Home India Nitrate in Drinking Water, कैंसर और प्रीमैच्योर डिलीवरी पर चिंता

Nitrate in Drinking Water, कैंसर और प्रीमैच्योर डिलीवरी पर चिंता

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Nitrate

1958 में तय हुई थी पानी में Nitrate की 50 मिलीग्राम प्रति लीटर सीमा

वायरल सच (ब्यूरो): पीने का साफ पानी हमेशा सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। पानी देखने में बिल्कुल साफ हो सकता है, लेकिन उसमें घुले कुछ रासायनिक तत्व लंबे समय तक सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी चिंता के बीच Drinking Water में Nitrate की स्वीकार्य मात्रा से जुड़े पुराने मानकों की समीक्षा की मांग उठी है। 85 स्वास्थ्य और पर्यावरण संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र की संबंधित स्वास्थ्य एजेंसी से 1958 में तय किए गए नाइट्रेट मानकों पर दोबारा विचार करने की अपील की है।

1958 में तय किए गए थे नाइट्रेट के मानक

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पीने के पानी में Nitrate की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 50 मिलीग्राम प्रति लीटर निर्धारित की गई थी। यह मानक मुख्य रूप से बच्चों में होने वाले ब्लू बेबी सिंड्रोम को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

ब्लू बेबी सिंड्रोम एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है और त्वचा का रंग नीला पड़ने लगता है। विशेष रूप से शिशुओं के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है।

नाइट्रेट शरीर को कैसे पहुंचा सकता है नुकसान

Nitrate का एक प्रमुख स्रोत कृषि गतिविधियां हैं। खेतों में इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों से नाइट्रेट जमीन में रिसकर भूजल तक पहुंच सकता है। इसके बाद यही पानी पीने के स्रोतों में शामिल हो सकता है।

कुछ शोधों में लंबे समय तक Nitrate के संपर्क और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच संबंध सामने आया है। इनमें आंतों के कैंसर और गर्भावस्था से जुड़ी कुछ जटिलताओं, जैसे समय से पहले प्रसव का जोखिम भी शामिल है।

हालांकि, किसी व्यक्ति में बीमारी होने का कारण केवल पानी में मौजूद Nitrate को नहीं माना जा सकता। इसके लिए अन्य जोखिम कारकों और वैज्ञानिक प्रमाणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

50 से घटाकर 6 मिलीग्राम करने की मांग

स्वास्थ्य और पर्यावरण संगठनों का कहना है कि Nitrate के पुराने मानकों की वर्तमान वैज्ञानिक शोध के आधार पर समीक्षा होनी चाहिए। पिछले वर्ष प्रकाशित एक अध्ययन में पानी में नाइट्रेट की सीमा घटाकर 6.0 मिलीग्राम प्रति लीटर करने का सुझाव दिया गया था।

यह प्रस्ताव मौजूदा 50 मिलीग्राम प्रति लीटर की सीमा से काफी कम है। संगठनों का मानना है कि नए वैज्ञानिक निष्कर्षों के आधार पर सुरक्षित सीमा निर्धारित करना जरूरी है, ताकि लोगों को लंबे समय तक होने वाले संभावित स्वास्थ्य जोखिमों से बचाया जा सके।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष चिंता

Nitrate के संभावित प्रभावों को लेकर गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीने के पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण महत्वपूर्ण है।

पानी का साफ दिखाई देना उसकी रासायनिक गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। इसलिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक मानकों, नियमित परीक्षण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

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