फतेहाबाद, वायरल सच (ब्यूरो) : आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन शॉपिंग और कूरियर सेवाएं हर घर की सामान्य आवश्यकता बन चुकी हैं। लोग मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स के माध्यम से सामान मंगवाते हैं, लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी भोले-भाले नागरिकों को ठगने में लगे हुए हैं। हाल ही में देशभर में पार्सल डिलीवरी स्कैम के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग लाखों रुपये गवां बैठे। इस संदर्भ में पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने सोमवार को आमजन को सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है।
एसपी ने कहा कि इस स्कैम में ठग खुद को कूरियर एजेंट, कस्टम अधिकारी या विदेशी मित्र बताकर दावा करते हैं कि आपके नाम से विदेश से कोई महंगा गिफ्ट आया है। कभी-कभी इसमें सोना, हीरे-जवाहरात, नकद राशि या महंगे ब्रांडेड सामान का लालच दिया जाता है। इसके बाद कॉल, ईमेल या व्हाट्सएप संदेश भेजकर यह बताया जाता है कि पार्सल एयरपोर्ट के कस्टम विभाग में फंसा है और उसे छुड़ाने के लिए तुरंत टैक्स या शुल्क चुकाना होगा। शुरुआत में मामूली रकम मांगी जाती है, लेकिन एक बार भुगतान करने के बाद लगातार नए-नए चार्जेज की मांग शुरू हो जाती है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ऐसे स्कैम में ठग लालच और डर दोनों का इस्तेमाल करते हैं। वे कभी महंगे उपहार का लालच देकर तो कभी कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर पीडि़तों पर दबाव बनाते हैं। इस तरह की ठगी के कुछ स्पष्ट संकेत हैं जैसे अनजान नंबर या ईमेल से गिफ्ट संदेश आना, केवल यूपीआई या ई-वॉलेट से पेमेंट की मांग होना, निजी बैंक अकाउंट में पैसे डालने का दबाव या बिना रसीद के कंपनी/कस्टम के नाम पर पैसे मांगना आदि। एसपी ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण है सतर्क रहना।
किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या लिंक पर भरोसा न करें और भुगतान से पहले पूरी तरह पुष्टि करें। यदि वास्तव में कोई पार्सल विदेश से आया हो, तो केवल अधिकृत वेबसाइट या कंपनी के कस्टमर केयर से ही संपर्क करें। व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार, पैन, बैंक अकाउंट नंबर या ओटीपी साझा न करें। इसके अलावा मोबाइल और ईमेल खातों पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें और किसी भी दबाव में आकर तुरंत भुगतान करने से बचें।
यदि कोई नागरिक इस तरह के स्कैम का शिकार हो जाए तो तुरंत निकटतम थाने में शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय पोर्टल पर या राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराई जा सकती है। बैंक लेन-देन की रसीद, चैट और ईमेल जैसे सभी सबूत सुरक्षित रखें ताकि जांच में सहायता मिल सके।
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