नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : बिहार में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ विपक्ष ने अपना विरोध तेज़ कर दिया है। मानसून सत्र के तीसरे दिन, बुधवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध-प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल रहे।
विरोध का कारण: बिहार मतदाता पुनरीक्षण विरोध
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव कमीशन द्वारा बिहार में शुरू की गई एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसमें वैधानिक गड़बड़ियां हैं। भाजपा समर्थित सरकार उस प्रक्रिया को ‘सामान्य’ कह रही है, लेकिन विपक्ष इसे एक तरह का मतदाता सूची से लोगों को बाहर करने की साजिश मानता है। प्रदर्शनी में पोस्टरों पर स्पष्ट लिखावट थी— “एसआईआर वापस लो”, “लोकतंत्र बचाओ”, और “इंसाफ चाहिए”।
राहुल गांधी का नेतृत्व
संसद परिसर के सामने जुटी भीड़ में राहुल गांधी ने नारा लगाया,
“हम बिहार में मतदाता पुनरीक्षण के नाम पर हो रहे फ्रॉड को रोकेंगे। लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देंगे।”
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर लिखा,
“विपक्ष लगातार तीसरे दिन ESIR प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन कर रहा है। संसद तुरंत इस मामले पर चर्चा करे।”
चुनाव कमीशन का पक्ष
चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना है, जिससे आने वाले विधानसभा चुनाव साफ‑सुथरे ढंग से सम्पन्न हो सकें। आयोग द्वारा जारी आँकड़ों में कहा गया है कि अब तक 90.67% मतदाताओं ने अपना फॉर्म जमा किया है। जल्द ही एक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी, और 30 सितंबर तक अंतिम सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।
राजनीतिक विवाद ही क्यों?
- विपक्ष का कहना है कि इस एसआईआर प्रक्रिया में कुछ वर्ग‑विशेष को कतार-बाहिर रखा जा रहा है।
- यह प्रक्रिया अचानक शुरू की गई — और चर्चा‑विरोध की गुंजाइश न देना, सवाल खड़े करती है।
- विपक्ष यह भी मानता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे अगला विधानसभा चुनाव पक्षपातपूर्ण वातावरण में हो सकता है।
भविष्य में क्या आने वाला है?
- अगली सुनवाई: विपक्ष की मांग पर संसद के भीतर संभावित बहस और चर्चा शुरू हो सकती है।
- विपक्षी दल तीसरे दिन का प्रदर्शन विफल नहीं मानेगा। आने वाले दिनों में प्रदर्शन तेज हो सकता है।
- समयरेखा: आयोग द्वारा ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने तक विवाद का सुरूर बने रह सकता है।
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