तालिबान सरकार को मान्यता देने वाला पहला देश बना रूस | अफगानिस्तान ने बताया साहसी कदम

नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो) : एक ऐतिहासिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम घटनाक्रम में रूस ने आधिकारिक रूप से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता दे दी है। रूस अब पहला ऐसा देश बन गया है जिसने तालिबान द्वारा नियुक्त अफगान राजदूत का परिचय पत्र स्वीकार कर लिया है। यह कदम वैश्विक राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है और अफगानिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

रूस ने तालिबान सरकार को दी आधिकारिक मान्यता

रूसी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि मॉस्को ने अफगानिस्तान के नए राजदूत का परिचय पत्र स्वीकार कर लिया है। इसका अर्थ यह है कि रूस ने अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबान सरकार को कूटनीतिक मान्यता प्रदान कर दी है।

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि रूस, काबुल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अच्छे अवसर देखता है। मंत्रालय के अनुसार, विशेष रूप से सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों, नशीली दवाओं के अपराध से निपटने और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में रूस सक्रिय रहेगा।

आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर ज़ोर

रूस का ध्यान अफगानिस्तान में ऊर्जा, परिवहन, कृषि, व्यापार और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में निवेश और साझेदारी पर केंद्रित है। यह कदम उस समय आया है जब अमेरिका और पश्चिमी देश अभी भी तालिबान सरकार को मान्यता देने से हिचक रहे हैं।

रूसी मंत्रालय ने यह भी कहा कि,

“हमारा मानना है कि अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात की सरकार की आधिकारिक मान्यता से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को गति मिलेगी।”

अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया: “यह एक उदाहरण बनेगा”

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“हम रूस द्वारा उठाए गए इस साहसी कदम की सराहना करते हैं। यह न केवल हमारे लिए बल्कि अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा।”

मुत्ताकी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मान्यता अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से स्थान दिलाने की दिशा में एक बड़ा क़दम है।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में क्या मायने हैं इस कदम के?

तालिबान की सरकार को 2021 में सत्ता में आने के बाद से किसी भी बड़े देश ने औपचारिक मान्यता नहीं दी थी। यह स्थिति अब बदलती नजर आ रही है। रूस का यह कदम पश्चिमी देशों की नीतियों से हटकर एक नई राह दिखा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह न केवल रूस की वैश्विक भूमिका को फिर से परिभाषित करता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि मॉस्को मध्य और दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।

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