भारत, वायरल सच (ब्यूरो) : साइप्रस संबंध 2025 में अब एक नई ऊर्जा दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन से पहले साइप्रस की यात्रा कर यह स्पष्ट कर दिया कि भारत भूमध्य सागर क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदारों को और मजबूत करने की दिशा में गंभीर है।
यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की बीते दो दशकों में साइप्रस की पहली यात्रा थी। यह यूं ही नहीं हुआ — ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की विदेश नीति में यह यात्रा एक अहम संदेश लिए हुए है।
भारत और साइप्रस: एक ऐतिहासिक और भरोसेमंद साझेदारी
- साइप्रस ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।
- भारत-अमेरिका परमाणु समझौते, NSG, और IAEA में भी साइप्रस ने भारत का समर्थन किया।
- साइप्रस EU का सदस्य है, जिससे भारत को यूरोप में कूटनीतिक और व्यापारिक लाभ मिल सकते हैं।
- पाकिस्तान समर्थक तुर्की का साइप्रस से वर्षों पुराना विवाद है, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से लाभकारी है।
तुर्की विरोधी रुख और ऑपरेशन सिंदूर का कनेक्शन
तुर्की ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ पाकिस्तान को ड्रोन तकनीक मुहैया कराई थी। ऐसे में साइप्रस, जो खुद तुर्की के अवैध कब्जे और सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करता है, भारत के लिए एक स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार बन गया है।
साइप्रस के उत्तरी भाग पर तुर्की का कब्जा है और वहां ‘तुर्की रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस’ का गठन किया गया है — जिसे कोई और देश मान्यता नहीं देता।
यूरोपीय संघ में साइप्रस की भूमिका और भारत के लिए अवसर
- 2026 की पहली छमाही में साइप्रस EU परिषद की अध्यक्षता करेगा, जो भारत के लिए एक बड़ा मौका हो सकता है।
- भारत चाहता है कि यूरोप उसके साथ सुरक्षा, आतंकवाद-विरोधी नीति और व्यापारिक सहयोग बढ़ाए।
- पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत को यूरोपीय समर्थन की जरूरत है, जिसमें साइप्रस पुल की भूमिका निभा सकता है।
IMEC और साइप्रस की भूमिका
IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) एक बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना है, जो भारत को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ने का कार्य करेगी।
साइप्रस, जो पूर्वी भूमध्य सागर में स्थित है, इस रूट में महत्वपूर्ण जंक्शन बन सकता है।
- भारत को खाड़ी देशों और यूरोप तक रेल, समुद्री और सड़क मार्गों से जोड़ने में मदद
- यूरोप के बाजारों तक तेजी से निर्यात और व्यापार का विस्तार
पीएम मोदी की यात्रा क्यों है अहम?
विदेश मंत्रालय के अनुसार:
- साइप्रस के साथ व्यापार, सुरक्षा, निवेश और तकनीक के क्षेत्र में नई साझेदारियों की शुरुआत हो सकती है।
- यह यात्रा कूटनीतिक बैलेंस बनाने का प्रयास भी है, खासकर तब जब वैश्विक भू-राजनीतिक हालात लगातार बदल रहे हैं।
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