Supreme Court की दिल्ली पुलिस को दो टूक: अपराधियों में कानून का डर जरूरी

नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हाल की यौन अपराध की घटनाओं पर सुनवाई करते हुए Supreme Court ने सोमवार को दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त सवाल उठाए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुलिस को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे अपराध करने की सोच रखने वालों के मन में कानून का डर पैदा हो।

Supreme Court ने कहा कि दिल्ली में महिलाएं रात में भी सड़कों पर चल सकें और मेट्रो या सड़क मार्ग से सफर करते समय उन्हें असुरक्षा महसूस न हो। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से यह भी पूछा कि यदि लगातार निगरानी नहीं होगी तो अपराधों को रोकने की प्रभावी व्यवस्था कैसे काम करेगी।

दिल्ली-NCR की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में हाल में सामने आई नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों की घटनाओं को लेकर स्वत: संज्ञान लिया है। यह मामला 28 सितंबर 2026 को शुरू हुई सुनवाई से आगे बढ़ा है, जिसमें कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर चिंता जताई थी।

Supreme Court के सामने जिन घटनाओं का उल्लेख हुआ, उनमें चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित गैंगरेप, स्वरूप नगर में नाबालिग से कथित गैंगरेप और हत्या तथा आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से कथित गैंगरेप के मामले शामिल हैं।Supreme Court

कोर्ट ने पूछा- अपराधियों में डर कैसे पैदा होगा?

5 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से अपराध की रोकथाम की रणनीति को लेकर सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी और लगातार मॉनिटरिंग ऐसी होनी चाहिए कि अपराध करने वाले व्यक्ति को कानून के परिणामों का डर रहे।

कोर्ट की टिप्पणी का मूल जोर अपराधियों में ऐसा भय पैदा करने पर था कि अपराध करने पर उन्हें गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

Supreme Court ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा केवल किसी घटना के बाद पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अपराध की रोकथाम के लिए पहले से प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

10 बजे रात भी महिला सुरक्षित महसूस करे- सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में ऐसी स्थिति होनी चाहिए कि कोई महिला रात 10 बजे भी सड़क पर चल सके और खुद को सुरक्षित महसूस करे। इसी तरह मेट्रो या सड़क से यात्रा करने वाली महिलाओं को भी सुरक्षा को लेकर भय नहीं होना चाहिए।

Supreme Court का जोर सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने पर है, ताकि महिलाएं और बच्चे पार्क, सड़क, बाजार, परिवहन केंद्र और अन्य सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल बिना डर के कर सकें।

पहले ही दिए जा चुके हैं सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

28 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में vulnerability mapping यानी संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए थे।

इसके तहत पुलिस टीमों को ऐसे स्थानों की पहचान करनी है जहां खराब रोशनी, CCTV की कमी, कम पुलिस पेट्रोलिंग, सुनसान क्षेत्र या अन्य व्यवस्थागत कमियां अपराध का खतरा बढ़ा सकती हैं।

कोर्ट ने संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ाने और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया है।Supreme Court

पार्क, सड़क और सार्वजनिक परिवहन पर नजर

Supreme Court ने सुरक्षा व्यवस्था को सिर्फ पुलिस थानों तक सीमित नहीं रखा। कोर्ट ने पार्कों, सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, बाजारों और शिक्षण संस्थानों जैसे स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पर जोर दिया है।

अदालत ने कहा है कि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था दिन के साथ-साथ शाम और देर रात के समय भी प्रभावी रहनी चाहिए।

CCTV और स्ट्रीट लाइटिंग का होगा ऑडिट

सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को पहचानने के लिए CCTV और लाइटिंग का ऑडिट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पुलिस और संबंधित एजेंसियों को यह देखना होगा कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था वास्तव में काम कर रही है या नहीं। नागरिकों की शिकायतों को भी ऐसे क्षेत्रों की पहचान में इस्तेमाल करने को कहा गया है।

हर पुलिस जिले में विशेष टीम बनाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के निर्देश के अनुसार दिल्ली के प्रत्येक पुलिस जिले में विशेष टीम गठित की जानी है। इन टीमों की अगुवाई कम से कम DSP स्तर के अधिकारी को करनी है।

टीमों को संवेदनशील इलाकों का सर्वे कर यह पता लगाना है कि किन स्थानों पर पुलिसिंग, निगरानी, रोशनी या अन्य सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

112 सिस्टम और अपराधियों के डेटाबेस की भी समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की प्रभावशीलता और यौन अपराधियों के डेटाबेस के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी भी मांगी है।

इसके अलावा यौन अपराधों की जांच की निगरानी और समयबद्धता से जुड़े सिस्टम की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।

फास्ट ट्रैक और POCSO कोर्ट पर भी नजर

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में Fast Track Special Courts और Exclusive POCSO Courts की स्थिति की जानकारी भी मांगी है।

कोर्ट यह देखना चाहता है कि ऐसे मामलों की सुनवाई कितनी तेजी से हो रही है और कितने मामले लंबित हैं। संबंधित रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

4 हफ्ते में रिपोर्ट देने के निर्देश

Supreme Court ने संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था और उठाए गए कदमों की व्यापक स्थिति रिपोर्ट मांगी है। अदालत की ओर से निर्धारित कई सुरक्षा उपायों को चार सप्ताह के भीतर लागू करने और उनकी स्थिति रिपोर्ट में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश

महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ घटना के बाद कार्रवाई से नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले उसे रोकने वाली मजबूत पुलिस व्यवस्था से सुनिश्चित करनी होगी।

दिल्ली-NCR की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी अब सिर्फ व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं है। अदालत का फोकस यह पता लगाने पर है कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है।

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