नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 24 सितंबर को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की और कहा कि उन्हें इस पद पर नियुक्त किए जाने का उन्होंने पहले ही विरोध किया था।
Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि देश में “वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी” हो रही है। उन्होंने कहा कि वोट लोकतंत्र की बुनियाद है और यदि मतदाताओं के वोट के साथ गड़बड़ी होती है तो उसका असर संसद, कानून और संवैधानिक संस्थाओं तक पड़ता है। ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना गया है।
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति का पहले भी किया था विरोध
Rahul Gandhi ने कहा कि CEC की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उन्होंने पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी। 2025 में ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के समय राहुल गांधी चयन समिति की बैठक में शामिल थे और उन्होंने एक dissent note दिया था।
उस समय राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया को कार्यपालिका के प्रभाव से स्वतंत्र होना चाहिए। उन्होंने चयन प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश और चयन समिति की संरचना को लेकर भी सवाल उठाए थे।
‘सरकार ने ज्ञानेश कुमार को कानून से ऊपर रखा’
Rahul Gandhi ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने CEC ज्ञानेश कुमार को ऐसी स्थिति में रखा जहां वह कानून और संस्थागत जवाबदेही से ऊपर दिखाई देते हैं।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि चुनावों में वोट चोरी के आरोप सही साबित होते हैं तो उन वोटों से चुने गए प्रतिनिधियों और उनके द्वारा बनाए गए कानूनों की वैधता पर भी सवाल उठता है। इसी संदर्भ में उन्होंने “वोट चोरी से कानून चोरी” की बात कही।
CEC से इस्तीफा देकर ‘सरकारी गवाह’ बनने की मांग
Rahul Gandhi ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने के साथ ही उन्हें “सरकारी गवाह” बनने की अपील भी की। उनके अनुसार, यदि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच होती है तो ज्ञानेश कुमार के पास महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है।
उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर सामने आए सवालों की जांच होने पर केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। यह राहुल गांधी का आरोप/दावा है, जिसका स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद का मुद्दा
Rahul Gandhi का ताजा हमला ऐसे समय आया है जब Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया पर भी राजनीतिक विवाद चल रहा है।
The Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और मतभेदों को लेकर सामने आई व्याख्याएं सही नहीं हैं।
राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
Rahul Gandhi ने अपने संबोधन में हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के चुनाव परिणामों और कथित एंटी-इन्कम्बेंसी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जिन राज्यों में सरकारों को एंटी-इन्कम्बेंसी का सामना करना पड़ा, वहां केंद्र सरकार के मामले में ऐसा क्यों नहीं दिखाई देता।
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को 2023 से 2026 तक की घटनाओं की एक टाइमलाइन के साथ भी जोड़ा। इसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून, विभिन्न चुनावों और कांग्रेस की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों का उल्लेख किया गया।
चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव बढ़ा
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों का दबाव ऐसे समय बढ़ा है जब SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेदों का उल्लेख किया गया है, जबकि चुनाव आयोग ने निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है।
Rahul Gandhi ने फिलहाल अपनी मांग दोहराते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की है।
