गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): हरियाणा में बिजली सप्लाई के लिए निजी कंपनी को पैरेलल लाइसेंस देने के मुद्दे पर राज्य सरकार ने हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) को ईमेल भेजकर प्रदेश में कहीं भी निजी कंपनी को पैरेलल लाइसेंस जारी नहीं करने के निर्देशों पर अमल करने को कहा है। यह कदम बिजली कर्मचारियों की करीब 45 घंटे चली हड़ताल और सरकार की ओर से लाइसेंस रद्द कराने के आश्वासन के बाद उठाया गया है। अब इस मामले में आयोग की आगे की कार्रवाई पर नजर है।
इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 का हवाला
अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, HERC को भेजी गई ईमेल में मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करने और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108 के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई है। सरकार की ओर से यह पहल निजी कंपनी को बिजली वितरण के लिए पैरेलल लाइसेंस देने के फैसले को रद्द कराने के प्रयास के रूप में सामने आई है।
हालांकि, ईमेल भेजे जाने के बाद भी लाइसेंस रद्द होने का अंतिम आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके लिए HERC की औपचारिक कार्रवाई और निर्णय जरूरी होगा।
HERC ने कहा, सभी पक्षों को सुनने के बाद आगे बढ़ेगा मामला
HERC के वर्किंग चेयरमैन मुकेश गर्ग के अनुसार, सोमवार को अवकाश होने के कारण आयोग की ओर से कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स का पक्ष सुना जाएगा और उसके बाद आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उनके मुताबिक, इस मामले में अभी समय लग सकता है।
वहीं, बिजली कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घणगस ने बताया कि सरकार की ओर से ईमेल भेज दी गई है। उनके अनुसार, इस संबंध में संबंधित प्राधिकरण के सामने अपील मंगलवार को किए जाने की संभावना थी।
गुरुग्राम और नूंह में लाइसेंस के विरोध में हुई थी हड़ताल
विवाद की शुरुआत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में बिजली सप्लाई का पैरेलल लाइसेंस दिए जाने के फैसले के विरोध से हुई थी। बिजली कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध करते हुए हड़ताल शुरू कर दी थी। कर्मचारियों की मांग थी कि सरकार इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 108 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे और निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस को रद्द कराने की कार्रवाई करे।
हड़ताल के दूसरे दिन सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच पंचकूला में दो दौर की बातचीत हुई। बातचीत में सरकार ने धारा 108 का इस्तेमाल करते हुए लाइसेंस रद्द कराने के लिए HERC के समक्ष अपील करने पर सहमति जताई। इस संबंध में पत्र सामने आने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी।
कर्मचारी संगठनों ने दावा किया था कि आंदोलन में करीब 50 हजार बिजली कर्मचारी शामिल हुए थे। हड़ताल लगभग 45 घंटे तक चली, जिसके दौरान बिजली सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।
शुरुआत में धारा 108 के इस्तेमाल पर नहीं बनी थी सहमति
कर्मचारी संगठनों का कहना था कि सरकार को शुरुआत से ही इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई करनी चाहिए थी। कर्मचारियों ने मांग की थी कि निजी कंपनी को पैरेलल लाइसेंस देने के फैसले को रद्द कराने के लिए सरकार तत्काल कदम उठाए।
शुरुआती बातचीत में इस मांग पर सहमति नहीं बन पाई थी। हालांकि, विरोध और बातचीत के बाद सरकार ने संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपील करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।
कर्मचारी मोर्चे को 10 दिन में कार्रवाई की उम्मीद
बिजली कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घणगस ने उम्मीद जताई कि HERC सरकार की ओर से भेजी गई ईमेल पर जल्द संज्ञान लेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पक्ष को उम्मीद है कि 10 दिन के भीतर लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। उनका तर्क है कि यह नीतिगत मामला है, इसलिए इसमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, 10 दिन में लाइसेंस रद्द होने की बात कर्मचारी मोर्चे की अपेक्षा है। आयोग की ओर से अंतिम निर्णय और उसकी समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि अलग से जरूरी होगी।
अब HERC के फैसले पर टिकी निगाहें
हरियाणा में पैरेलल लाइसेंस का मुद्दा बिजली कर्मचारियों, राज्य सरकार और नियामक आयोग के बीच महत्वपूर्ण विषय बन गया है। सरकार की ईमेल के बाद अगला कदम HERC की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। आयोग सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आगे की कार्रवाई करेगा। फिलहाल, निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस को रद्द करने के संबंध में अंतिम आदेश जारी होने का इंतजार है।
