Home India एनएच-30 पर पेड़ गिरा, भारी बारिश से बस्तर में जाम की स्थिति

एनएच-30 पर पेड़ गिरा, भारी बारिश से बस्तर में जाम की स्थिति

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एनएच-30 पर पेड़ गिरा

जगदलपुर, वायरल सच (ब्यूरो) : बस्तर संभाग में लगातार चार दिनों से हो रही भारी बारिश ने जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं दूसरी ओर यह बारिश अब एक संकट का रूप लेती जा रही है। सड़कों पर पानी का बहाव, घरों में सीलन और जनजीवन का थम जाना—ये अब सामान्य दृश्य बन गए हैं। इसी बीच बीती रात एक बड़ी दुर्घटना ने फिर से यह याद दिला दिया कि प्रकृति जब विकराल होती है, तो उसकी मार झेलना आसान नहीं होता।

NH-30 पर टूटा पेड़ बना यातायात के लिए बाधा
राष्ट्रीय राजमार्ग 30, जो जगदलपुर को दंतेवाड़ा से जोड़ता है, उस पर स्थित महिंद्रा शोरूम और शिव मंदिर के पास शुक्रवार देर रात एक विशाल पेड़ धराशायी हो गया। बारिश के चलते जमीन गीली हो चुकी थी और जड़ें कमजोर हो गई थीं, जिससे यह पेड़ सीधे सड़क पर आ गिरा। रात के समय सड़क पर ज्यादा ट्रैफिक नहीं था, इसलिए किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है, लेकिन भारी वाहनों और बसों की आवाजाही पूरी तरह से रुक गई।

स्थानीय लोगों ने दिखाई तत्परता, प्रशासन नदारद
सुबह जब स्थानीय लोग अपने रोजमर्रा के कामों के लिए घरों से निकले तो सड़क पर पसरे पेड़ को देखकर चौक गए। इलाके के युवाओं और समाजसेवियों ने पेड़ के कुछ हिस्से को कुल्हाड़ियों और आरी से काटकर रास्ता आंशिक रूप से चालू कराया। फिर भी, पेड़ का एक बड़ा हिस्सा अब भी सड़क के बीचों-बीच पड़ा हुआ है, जिससे वाहनों की कतारें लगनी शुरू हो गई हैं।

प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया, लोग कर रहे हैं इंतजार
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस स्थिति की जानकारी नगर निगम और वन विभाग को सुबह ही दे दी थी, लेकिन दोपहर तक कोई भी संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। लोग निराश हैं कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आपातकालीन सेवाएं इतनी धीमी क्यों हैं।

एक स्थानीय दुकानदार रमेश यादव ने बताया, “हमने कई बार सूचना दी, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। जब तक कोई दुर्घटना न हो, तब तक शायद कोई सुनवाई नहीं होती।”

छात्र, कर्मचारी और आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित
इस मार्ग का उपयोग करने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स, स्कूल जाने वाले बच्चे, ड्यूटी पर जा रहे कर्मचारी और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। आंशिक रूप से खुली सड़क पर दोनों तरफ वाहनों की धीमी रफ्तार से जाम की स्थिति बनी हुई है। कई यात्रियों को रास्ता बदलकर अपने गंतव्य तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।

सवाल उठता है: क्या बारिश के लिए हमारी तैयारियां पर्याप्त हैं?
हर साल बस्तर क्षेत्र में मॉनसून के दौरान इस तरह की घटनाएं आम हो जाती हैं, लेकिन प्रशासनिक तैयारी नाममात्र की रहती है। न तो पेड़ों की समय-समय पर छंटाई होती है, और न ही जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई देती है। भारी बारिश के कारण पेड़ गिरना, दीवारें ढहना, और बिजली के खंभों का झुकना अब आम होता जा रहा है।

जन अपील और समाधान की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:

  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर जोखिमभरे पेड़ों की पहचान और कटाई समय रहते की जाए।
  • बारिश के दिनों में आपातकालीन रिस्पॉन्स टीम तैयार रहे।
  • वन विभाग और नगर निगम के बीच समन्वय बेहतर किया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई हो।

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