काजी उस्मान गिरफ्तारी: प्रोफेसर पर आतंक से संबंध का आरोप, मानवाधिकारों पर उठे सवाल

पाकिस्तान, वायरल सच (ब्यूरो) : बलोचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बलोचिस्तान सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और प्रबंधन विज्ञान विश्वविद्यालय (बीयूआईटीईएमएस) के सहायक प्रोफेसर काजी उस्मान की गिरफ्तारी की घोषणा की। उन पर क्वेटा रेलवे स्टेशन पर आत्मघाती बम विस्फोट और अन्य हमलों में मदद करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि प्रो. काजी उस्मान को 12 अगस्त को सुरक्षा बल के जवान जबरिया उठा ले गए थे। तब से वह लापता थे। मानवाधिकार संगठनों की आलोचना के बाद बुगती ने यह घोषणा सोमवार को की।

मुख्यमंत्री बुगती ने क्वेटा में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक वीडियो में उस्मान का एक रिकॉर्डेड बयान सुनाया। उस्मान इसमें कह रहे हैं कि उन्होंने कायद-ए-आजम विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और पेशावर विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वीडियो में उन्होंने आतंकवादी समूहों के साथ कथित संबंधों की बात कबूल की। हालांकि, परिवार और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उस्मान और उनके छोटे भाई जिबरान अहमद को 12 अगस्त को क्वेटा के अफनान कस्बे से सुरक्षा बल और आतंकवाद-रोधी विभाग के अधिकारी जबरदस्ती उठा ले गए थे। इसके बाद उन्हें कहां रखा गया, यह भी कोई बताने को तैयार नहीं था।

सहायक प्रोफेसर काजी के कबूलनामे पर बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) की मानवाधिकार शाखा पांक ने कहा कि यह जबरन कबूलनामा पूर्वाग्रह से प्रेरित है। यह निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करता है। इस मसले पर प्रमुख मानवाधिकार वकील इमान मजारी ने कहा कि उन्होंने खुद देखा है कि कैसे बंदियों को धमकी देकर स्क्रिप्टेड संदेश रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर किया जाता है। मजारी ने कहा कि डॉ. उस्मान काजी आतंकवादी नहीं हैं। आज पूरा पाकिस्तान सैन्य अदालत बन गया है। मुल्क में जबरन गायब किए गए लोगों को आतंकवादी के रूप में पेश किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लोग वास्तव में संदिग्ध हैं, तो उन्हें गायब क्यों किया जाता है। उन्हें कानून के अनुसार गिरफ्तार क्यों नहीं किया जाता?

बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने कहा कि कथित स्वीकारोक्ति ने “गंभीर कानूनी प्रश्न” उठाए हैं और यह “मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन” है। संगठन ने तर्क दिया कि यह वीडियो सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया। इससे पता चलता है कि सरकारी संस्थाएं “न्याय पर दुष्प्रचार को प्राथमिकता दे रही हैं।” बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने कहा कि बलोचिस्तान में असहमति को दबाने के लिए ऐसे हथकंडों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रोफेसर उस्मान काजी की जान को गंभीर खतरा है।

हमें फ़ॉलो करें

फेसबुक – https://www.facebook.com/viralsachnewz
यूट्यूब – https://www.youtube.com/@viralsachnewz
इंस्टाग्राम – https://www.instagram.com/viralsachnewz/
ट्विटर – https://x.com/viralsachnewz

अधिक जानकारी के लिए फ़ॉलो करें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles