ईरान, वायरल सच (ब्यूरो) : मध्य-पूर्व एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन गया है। हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को लेकर वैश्विक चिंता गहराती जा रही है। इस मुद्दे पर सबसे अधिक चिंता फ्रांस ने जताई है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत कर अपनी गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि ईरान एनपीटी से खुद को बाहर कर लेता है तो यह पूरी वैश्विक परमाणु व्यवस्था के लिए सबसे खराब स्थिति होगी।
मैक्रों की चेतावनी: “ईरान का NPT से बाहर जाना भटकाव होगा”
मैक्रों ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि अमेरिका के हमलों से ईरान को गंभीर नुकसान पहुंचा है और अब यह लगभग तय है कि वह परमाणु अप्रसार संधि से खुद को अलग कर लेगा।
उन्होंने कहा:
“यदि ईरान NPT से बाहर होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का भटकाव होगा और परमाणु हथियारों को रोकने की वैश्विक रणनीति कमजोर पड़ जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों से बातचीत करेंगे ताकि किसी भी हाल में संधि को बरकरार रखा जा सके।
ट्रंप से की बात, तेहरान से भी संपर्क
राष्ट्रपति मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बात की और तेहरान के साथ डिप्लोमैटिक संपर्क बनाए रखने की जानकारी दी।
उनका कहना है कि:
“हमारा साझा उद्देश्य यही होना चाहिए कि ईरान दोबारा परमाणु निर्माण कार्य शुरू न करे।”
ईरान और NPT: इतिहास क्या कहता है?
- 1970 में ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर किए थे।
- अमेरिका की मदद से 1950 के दशक में ईरान ने असैन्य परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी थी।
- ईरान ने IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के तहत अपनी परमाणु गतिविधियों की निगरानी की स्वीकृति दी थी।
2000 के दशक में बढ़ा संदेह
2002-2003 के बीच ईरान के गोपनीय परमाणु स्थलों की खबरें सामने आईं।
2011 में IAEA की रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अग्रसर था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव में ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन गतिविधियां रोकनी पड़ीं।
ईरान की प्रतिक्रिया: अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसके परमाणु ठिकानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और NPT की भावना का उल्लंघन है।
ईरानी बयान में कहा गया:
“हमारे परमाणु ठिकाने IAEA की निगरानी में थे। यह हमला सिर्फ सुरक्षा समझौते का उल्लंघन नहीं, बल्कि वैश्विक परमाणु संतुलन के खिलाफ साज़िश है।”
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह अब NPT को छोड़ने का विचार कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर परमाणु शांति के लिए एक गंभीर झटका होगा।
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