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हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी विवाद: अकाल पंथक मोर्चा ने सरकार की दखलअंदाजी को बताया अलोकतांत्रिक

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हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी विवाद

सिरसा, वायरल सच (ब्यूरो) : हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGPC) को लेकर बढ़ती खींचतान ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। अकाल पंथक मोर्चा के सदस्यों ने आज सिरसा में मीडिया से बात करते हुए हरियाणा सरकार पर आरोप लगाए कि वह गुरुद्वारा कमेटी में जबरन प्रधान थोपने का प्रयास कर रही है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने हस्तक्षेप जारी रखा तो यह सिख समाज के अधिकारों पर सीधा हमला माना जाएगा।

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी विवाद पर मोर्चा की खुली चेतावनी

मोर्चा के सदस्यों — कुलदीप सिंह, कर्मजीत सिंह, गुरमेज सिंह, और हरमनप्रीत सिंह — ने आरोप लगाया कि HSGPC के हालिया चुनावों में निष्पक्ष रूप से सदस्यों का चयन हुआ था, लेकिन प्रधान पद पर बिना चुनाव के एकतरफा फैसला थोप दिया गया। उनका कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है और इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दादूवाल पर ऑडिट में दखल देने का आरोप

मोर्चा ने धर्म प्रचारक बलजीत सिंह दादूवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे हर बार ऑडिट प्रक्रिया में दखल देते हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे तत्वों पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि गुरुद्वारों का कार्य सही तरीके से संचालित हो सके।

चुनाव के जरिए प्रधान नियुक्त करने की मांग

मोर्चा ने कहा कि यदि बहुमत या चुनाव के जरिए प्रधान चुना जाता, तो वे उसका समर्थन करते। लेकिन वर्तमान में जिस तरह से नियुक्ति की गई है, वह सिखों की आस्था और लोकतंत्र की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि सरकार को निष्पक्ष रहकर, एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत प्रधान का चयन कराना चाहिए।

कानूनी लड़ाई का ऐलान

अकाल पंथक मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के इस फैसले को कानून के दायरे में चुनौती देंगे। इसके लिए:

  • कमेटी के संविधान का गहन अध्ययन किया जा रहा है।
  • गुरुद्वारा इलेक्शन कमीशन में 2 याचिकाएं पहले ही दाखिल की जा चुकी हैं।
  • यदि जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

मोर्चा का दृष्टिकोण: यह धार्मिक नहीं, अधिकारों की लड़ाई है

मोर्चा ने कहा कि यह विवाद सिर्फ धार्मिक भावना से जुड़ा नहीं है, बल्कि सिख समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह गुरुद्वारों में राजनीतिक हस्तक्षेप न करे और सिख समाज को स्वयं निर्णय लेने दे।

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