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गुरुग्राम में पानी की किल्लत दूर करने की तैयारी, चंदू बुढ़ेड़ा में बनेगा 100 MLD का नया प्लांट

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गुरुग्राम को मिलेगा 100 MLD अतिरिक्त पानी

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): गुरुग्राम में तेजी से बढ़ती आबादी और पेयजल की बढ़ती मांग को देखते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत चंदू बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में 100 MLD क्षमता की छठी जल शोधन इकाई स्थापित की जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में परियोजना के टेंडर को मंजूरी दी गई है।

नई इकाई के शुरू होने से द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हो रहे सेक्टर-81 से 115 और आसपास की रिहायशी सोसायटियों में पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है। परियोजना के तहत आधुनिक जल शोधन और पंपिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य शहर की मौजूदा जरूरतों के साथ भविष्य में बढ़ने वाली पानी की मांग को पूरा करने की क्षमता तैयार करना है।

नए गुरुग्राम की बढ़ती आबादी के लिए बढ़ेगी जलशोधन क्षमता

गुरुग्राम में आवासीय सोसायटियों, व्यावसायिक परियोजनाओं और नए सेक्टरों का तेजी से विस्तार हो रहा है। खासकर द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हो रहे क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के साथ पेयजल की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जलापूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है।

100 MLD की नई यूनिट स्थापित होने के बाद अतिरिक्त पानी को शोधित करके आपूर्ति व्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा। इससे नए विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक आपूर्ति का लाभ परियोजना पूरी होने, पानी की उपलब्धता और वितरण नेटवर्क की क्षमता पर भी निर्भर करेगा।

15 एकड़ जमीन पर बनेगी नई जल शोधन इकाई

चंदू बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में करीब 15 एकड़ भूमि पर नई इकाई विकसित की जाएगी। परियोजना में जल शोधन के साथ पानी के भंडारण और वितरण से जुड़ी सुविधाओं को भी शामिल किया गया है।

योजना के तहत निम्नलिखित व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी:

  • क्लियर वाटर रिजर्वायर: शोधित पानी के भंडारण के लिए जलाशय बनाया जाएगा।
  • पंपिंग व्यवस्था: कच्चे और शोधित पानी की पंपिंग के लिए आवश्यक सुविधाएं स्थापित होंगी।
  • स्लज सुखाने की मशीनें: जल शोधन प्रक्रिया से निकलने वाले स्लज को मशीनों के माध्यम से सुखाने की सुविधा विकसित की जाएगी।
  • SCADA नेटवर्क: नई इकाई को जीएमडीए के सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे संचालन और निगरानी में मदद मिलेगी।

परियोजना के लिए काम आवंटित होने के बाद 24 महीने के भीतर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

अभी दोनों प्लांट से रोजाना 770 एमएलडी पानी की आपूर्ति

जीएमडीए के मौजूदा जलापूर्ति ढांचे में चंदू बुढ़ेड़ा और बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में इन दोनों प्लांटों से प्रतिदिन लगभग 770 MLD पानी की आपूर्ति की जा रही है।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट वर्तमान आपूर्ति
चंदू बुढ़ेड़ा प्लांट 500 MLD
बसई प्लांट 270 MLD
कुल 770 MLD
नई प्रस्तावित इकाई 100 MLD

नई इकाई शुरू होने पर चंदू बुढ़ेड़ा प्लांट की जलशोधन क्षमता में 100 MLD की अतिरिक्त वृद्धि होगी। यदि मौजूदा आपूर्ति स्तर बना रहता है और नई इकाई की पूरी क्षमता का इस्तेमाल होता है, तो दोनों प्लांटों से कुल जलशोधन क्षमता लगभग 870 MLD प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। यह संभावित क्षमता का आकलन है, वास्तविक दैनिक आपूर्ति की गारंटी नहीं।

वर्ष 2051 तक की जरूरतों पर जीएमडीए का फोकस

गुरुग्राम की आबादी और शहरी क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए जीएमडीए लंबी अवधि की जलापूर्ति योजना पर भी काम कर रहा है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा के अनुसार, शहर की तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए बुनियादी सुविधाओं की क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि चंदू बुढ़ेड़ा में अतिरिक्त जल शोधन इकाई स्थापित होने से पानी की उपलब्धता बढ़ाने और मौजूदा व नए सेक्टरों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। प्राधिकरण वर्ष 2051 तक गुरुग्राम की जलापूर्ति संबंधी जरूरतों का आकलन भी कर रहा है, ताकि भविष्य की मांग के अनुरूप सुविधाओं का विकास किया जा सके।

नए सेक्टरों में पेयजल आपूर्ति को मिलेगी मजबूती

100 MLD की नई इकाई गुरुग्राम के जलापूर्ति ढांचे के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इससे द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हो रहे सेक्टरों और आवासीय क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त जलशोधन क्षमता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, नई इकाई का निर्माण पूरा होने और उसके संचालन में आने तक मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था ही काम करती रहेगी। परियोजना की समयसीमा, पानी की उपलब्धता और वितरण नेटवर्क के विस्तार के आधार पर ही यह तय होगा कि विभिन्न क्षेत्रों को अतिरिक्त पानी का लाभ कब और कितना मिल सकेगा।

जीएमडीए की यह योजना गुरुग्राम की वर्तमान पेयजल जरूरतों के साथ वर्ष 2051 तक की अनुमानित मांग को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे व्यापक बुनियादी ढांचे के विकास का हिस्सा है।

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