Gurugram, वायरल सच (ब्यूरो): Gurugram में स्टिल्ट-प्लस-4 मंजिलों वाली इमारतों को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। हरियाणा के नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग (DTCP) ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया है कि 2 अप्रैल 2026 तक गुरुग्राम में 32,024 आवासीय प्लॉटों पर स्टिल्ट-प्लस-4 निर्माण के लिए मंजूरियां दी जा चुकी थीं। सरकार ने उन दावों का विरोध किया है जिनमें नीति दोबारा लागू होने के बाद बड़े पैमाने पर जल्दबाजी में मंजूरियां देने की बात कही गई थी। Gurugram Stilt Plus 4 Policy को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन है।
गुरुग्राम में कहां-कितनी मंजूरियां दी गईं?
DTCP के हलफनामे के मुताबिक, गुरुग्राम में कुल 32,024 मंजूरियों में से 18,719 भवन योजनाओं को निजी लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में विभाग ने मंजूरी दी थी। वहीं, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के सेक्टरों में 13,305 भवन योजनाओं को मंजूरी दी गई थी।
सरकार ने अदालत में कहा कि इन आंकड़ों को केवल जुलाई 2024 में नीति दोबारा लागू होने के बाद दी गई मंजूरियों के रूप में देखना सही नहीं है। विभाग के अनुसार, निजी लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में गुरुग्राम-मानेसर शहरी परिसर की 15,447 मंजूर भवन योजनाओं में से 9,625 योजनाएं यानी 62.3 प्रतिशत, 1 जुलाई 2024 से पहले स्वीकृत हुई थीं।
बाकी 5,822 योजनाओं यानी 37.7 प्रतिशत को 2 जुलाई 2024 से लेकर 2 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट के रोक आदेश तक मंजूरी दी गई थी। विभाग ने अदालत में यह भी कहा कि लगभग 30 हजार मंजूरियां केवल जुलाई 2024 के आदेश के बाद दिए जाने का दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
स्टिल्ट-प्लस-4 नीति क्या है?
स्टिल्ट-प्लस-4 व्यवस्था के तहत आवासीय इमारत में स्टिल्ट पार्किंग के ऊपर चार मंजिलों के निर्माण की अनुमति दी जाती है। गुरुग्राम में इस व्यवस्था के तहत बड़े पैमाने पर आवासीय निर्माण हुआ है, लेकिन इसके साथ पार्किंग, जल निकासी, सड़क क्षमता और अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं।
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) ने कथित तौर पर नीति के दुरुपयोग के मुद्दे उठाए हैं। इनमें संकरी सड़कों पर पेइंग गेस्ट (PG) सुविधाएं चलाने, छोटे प्लॉटों पर चार मंजिला निर्माण और स्टिल्ट पार्किंग की जगह का अन्य उपयोग करने जैसी शिकायतें शामिल हैं।
Gurugram Stilt Plus 4 Policy पर विवाद का एक प्रमुख पहलू यह है कि इमारतों की संख्या बढ़ने के साथ संबंधित क्षेत्रों में पानी, सीवर, बिजली, पार्किंग और सड़कों जैसी सुविधाओं की पर्याप्त क्षमता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
पहले रोक, फिर प्रतिबंधों के साथ दोबारा लागू हुई थी नीति
हरियाणा सरकार ने फरवरी 2023 में स्टिल्ट-प्लस-4 नीति के तहत नई मंजूरियों पर रोक लगाई थी। इसके बाद सेवानिवृत्त अधिकारी पी. राघवेंद्र राव की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी।
समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 2 जुलाई 2024 को कुछ प्रतिबंधों के साथ नीति को दोबारा लागू किया। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को इस संबंध में जारी अधिसूचना पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद नीति के तहत चल रहे निर्माण और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) जारी करने पर रोक लगाने की मांग को लेकर भी अदालत में याचिका दायर की गई। DTCP ने अपने हलफनामे में सभी मंजूरियों और निर्माण पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की मांग का विरोध किया।
विभाग का तर्क है कि किसी विशेष इमारत में कथित अनधिकृत निर्माण होने के आधार पर सभी मंजूरियों और निर्माण गतिविधियों पर एक साथ रोक लगाना उचित नहीं होगा। विभाग के अनुसार, हर मामले में संबंधित नियमों और स्वीकृत भवन योजना के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
स्टिल्ट पार्किंग बंद करने पर मंजूरी रद्द होने का प्रावधान
नीति के तहत स्टिल्ट क्षेत्र का उपयोग पार्किंग के लिए किया जाना है। DTCP ने अदालत में कहा कि यदि स्टिल्ट पार्किंग क्षेत्र को पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद करके उसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है, तो संबंधित भवन योजना की मंजूरी या ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने बताया कि ऐसे मामलों में स्वीकृत भवन योजना के उल्लंघन की जांच ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया के दौरान की जा सकती है। हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा 10 के तहत संबंधित मामलों में कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है।
यह व्यवस्था उन शिकायतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है जिनमें स्टिल्ट पार्किंग की जगह को आवासीय या व्यावसायिक इस्तेमाल में लाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, किसी विशेष इमारत के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय संबंधित तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर होगा।
पानी, सीवर और सड़कों की क्षमता की जांच भी अहम
गुरुग्राम में तेजी से बढ़ते आवासीय निर्माण के बीच बुनियादी सुविधाओं की क्षमता का मुद्दा भी अदालत के समक्ष रखा गया है। DTCP के हलफनामे के मुताबिक, HSVP ने पानी की आपूर्ति, सीवर व्यवस्था, बिजली और सड़कों की क्षमता की सेक्टरवार जांच के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की है।
विभाग ने कहा कि जहां नागरिक सुविधाओं की क्षमता अपर्याप्त है, वहां प्राथमिकता के आधार पर ऑडिट किया जाएगा। इसके लिए स्टिल्ट-प्लस-4 से संबंधित शुल्क से अलग खाते के माध्यम से धन उपलब्ध कराने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
Gurugram Stilt Plus 4 Policy से जुड़े विवाद में यह पहल इसलिए अहम है क्योंकि आवासीय निर्माण की मंजूरी के साथ इलाके की मौजूदा सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है।
अब अदालत की सुनवाई पर टिकी निगाहें
हरियाणा सरकार ने अपने हलफनामे में सभी मंजूरियों पर एक साथ रोक लगाने की मांग का विरोध किया है। दूसरी ओर, निवासियों की ओर से पार्किंग, जल निकासी, निर्माण नियमों और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
2 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट द्वारा नीति की पुनर्बहाली संबंधी अधिसूचना पर लगाई गई रोक इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिलहाल, मंजूरियों के आंकड़ों और नीति के क्रियान्वयन को लेकर दोनों पक्षों के तर्क अदालत के सामने हैं।
Gurugram Stilt Plus 4 Policy पर अंतिम स्थिति अदालत की आगे की सुनवाई और संबंधित आदेशों से स्पष्ट होगी। इस बीच, भवन निर्माण की मंजूरी, स्टिल्ट पार्किंग के उपयोग और नागरिक सुविधाओं की क्षमता से जुड़े नियमों का पालन करना संबंधित विभागों, बिल्डरों और संपत्ति मालिकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
