गुरुग्राम: टेनिस प्लेयर बेटी राधिका की हत्या कर चुका पिता बोला – “जो हो गया सो हो गया”, नहीं है कोई पछतावा

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : हरियाणा के गुरुग्राम में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपनी ही बेटी – टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या कर दी। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी पिता दीपक यादव ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसे अपने इस क्रूर कृत्य का कोई पछतावा नहीं है। उसने कहा – “जो हो गया सो हो गया”।

अपराध कबूल, लेकिन पछतावा नहीं
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दीपक यादव ने पुलिस रिमांड के दौरान हत्या करने की बात कबूल की।

  • उसने कहा कि जो कुछ हुआ, वह हो चुका है और उसे इस पर कोई अफसोस नहीं।
  • पहले तो उसने खुद को फांसी की सजा देने की मांग की थी, लेकिन अब वह जेल में पूरी तरह शांत और संयमित नजर आ रहा है।

भोंडसी जेल में कैदी नंबर 4142
दीपक यादव को गुरुग्राम जिला जेल (भोंडसी) में कैदी संख्या 4142 दी गई है।

  • उसे जेल की उस बैरक में रखा गया है, जहां 60 हार्डकोर अपराधी पहले से बंद हैं।
  • जेल प्रशासन के मुताबिक, दीपक वहां बिलकुल शांत स्वभाव से रह रहा है, समय पर खाना खा रहा है और कोई अव्यवस्था नहीं फैला रहा।

मोबाइल डाटा से मिलेगी सच्चाई?
गुरुग्राम पुलिस इस हत्या के पीछे के गहरे कारणों की जांच कर रही है।

राधिका यादव के मोबाइल फोन को फोरेंसिक लैब भेजा गया है।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

  • वह किससे बात करती थी?
  • कौन-कौन से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती थी?
  • क्या उसने कोई आखिरी कॉल या मैसेज किया था?
  • मोबाइल से आखिरी बार डाटा कब डिलीट किया गया?

जनता से सहयोग की अपील
गुरुग्राम पुलिस ने आम जनता और राधिका की दोस्तों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी हो तो वे पुलिस से गोपनीय रूप से संपर्क करें।

पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने कहा:
“यह मामला संवेदनशील है। हमें सच्चाई तक पहुंचने के लिए हर दृष्टिकोण से जांच करनी है। यदि कोई व्यक्ति राधिका के जीवन से जुड़ी जानकारी देना चाहता है, तो पुलिस को उसका पूरा सहयोग चाहिए।”

दीपक यादव की मानसिक स्थिति पर सवाल
जेल सूत्रों के अनुसार:

  • दीपक यादव फिलहाल मानसिक रूप से स्थिर दिख रहा है।
  • उसका व्यवहार ऐसा है जैसे उसने कोई सामान्य बात की हो।
  • पहले जो व्यक्ति खुद को फांसी देने की बात कर रहा था, अब वह पछतावे के भाव से मुक्त नजर आता है, जो चिंता का विषय है।

समाज के लिए प्रश्न
यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

  • क्या रिश्तों में विश्वास इतना कमजोर हो चुका है?
  • क्या मानसिक तनाव या परिवारिक विवाद इस हद तक जा सकते हैं कि कोई पिता अपनी बेटी की हत्या कर दे?

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