Gurugram , वायरल सच (ब्यूरो): Gurugram की लाइसेंस कॉलोनियों में रिहायशी संपत्तियों का कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों पर अब कार्रवाई और सख्त होगी। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने ऐसे परिसरों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है, जहां स्वीकृत भू-उपयोग के विपरीत गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
विभाग के डीटीपी एन्फोर्समेंट की ओर से पिछले करीब दो महीनों में 150 इमारतों को सील किया गया है। इनमें 98 PG, गेस्ट हाउस और होटल हैं, जबकि 52 अन्य मकानों में अलग-अलग तरह की कमर्शियल गतिविधियां चलती मिलीं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य मामले की सुनवाई के दौरान रिहायशी क्षेत्रों में भू-उपयोग से अलग गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मामले में हरियाणा सरकार और गुरुग्राम से जुड़े कई विभाग भी पक्षकार हैं।
कोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई करते समय उसके स्वीकृत भू-उपयोग, बिल्डिंग प्लान और सक्षम प्राधिकरण से मिली अनुमति को आधार बनाया जाना चाहिए।
यदि किसी इलाके को केवल रिहायशी उपयोग के लिए मंजूरी मिली है और वहां नियमों के विपरीत कमर्शियल गतिविधि संचालित होती मिलती है, तो संबंधित परिसर के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की जा सकती है।
DLF, सुशांत लोक और साउथ सिटी में कार्रवाई
Gurugram में डीटीपी एन्फोर्समेंट की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत मुख्य रूप से DLF Phase-3, DLF Phase-4, Sushant Lok-1 और South City-1 में कार्रवाई की गई है।
अभियान के दौरान सामने आया कि कई रिहायशी मकानों का इस्तेमाल रहने के बजाय PG, गेस्ट हाउस, होटल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
98 PG, गेस्ट हाउस और होटल पर कार्रवाई
सील की गई 150 इमारतों में 98 ऐसी संपत्तियां हैं, जहां PG, गेस्ट हाउस या होटल संचालित किए जा रहे थे। इसके अलावा 52 मकानों में अन्य प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां पाई गईं।
विभाग की कार्रवाई फिलहाल खत्म नहीं हुई है। DLF समेत 32 लाइसेंस कॉलोनियों में नियमों के विपरीत चल रही गतिविधियों की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।
मास्टर प्लान के खिलाफ इस्तेमाल पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक यदि मास्टर प्लान या स्वीकृत लेआउट के तहत किसी क्षेत्र का उपयोग केवल आवासीय निर्धारित है, तो वहां व्यावसायिक गतिविधि को मंजूरी नहीं दी जा सकती।
ऐसे मामलों में सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है। संबंधित भू-उपयोग, स्वीकृत नक्शे और उपलब्ध अनुमतियों की भी जांच की जाएगी।
कोर्ट में मामला लंबित होने पर भी कार्रवाई संभव
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि किसी संपत्ति से संबंधित मामला अदालत में लंबित होना अपने आप कार्रवाई पर रोक लगाने का आधार नहीं है।
यदि जमीन या भवन का इस्तेमाल उसके स्वीकृत उद्देश्य से अलग पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकरण कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है।
इसी तरह, यदि किसी निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति ही नहीं ली गई है, तो नियमानुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।
Gurugram में इस अभियान के आगे बढ़ने के साथ रिहायशी कॉलोनियों में चल रहे PG, गेस्ट हाउस, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर विभाग की निगरानी और कार्रवाई बढ़ने की संभावना है।
