गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में मॉनसून की पहली मूसलाधार बारिश ने वो तस्वीर पेश की, जो किसी भी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संस्थान के लिए शर्मनाक मानी जा सकती है। बुधवार रात हुई तेज़ बारिश ने अस्पताल की पूरी बेसमेंट को पानी-पानी कर दिया। जलभराव इतना ज्यादा था कि मरीजों का इलाज पानी में खड़े होकर करना पड़ा। आखिरकार गुरुवार सुबह अस्पताल प्रशासन को सभी मरीजों को ऊपर की मंजिलों पर शिफ्ट करना पड़ा
बेसमेंट बना तालाब, मरीजों को देख हलकान हुआ स्टाफ
गुरुग्राम मानसून जलभराव की चपेट में आने वाला यह एक और उदाहरण है, जहां न सिर्फ सड़कों पर, बल्कि अस्पताल जैसे जरूरी संस्थानों के भीतर भी पानी घुस आया। सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल की बेसमेंट में बने वार्ड में लगभग 30 मरीज भर्ती थे। रातभर बारिश के चलते पूरा वार्ड जलमग्न हो गया। अस्पताल स्टाफ पानी में घुटनों तक डूबकर मरीजों की सेवा करता रहा। इलाज तो दूर, वहां खड़ा होना तक मुश्किल हो गया था।
बिना तैयारी, बिना निकासी सिस्टम: जिम्मेदारी कौन लेगा?
अस्पताल की इमारत भले ही बाहर से भव्य नजर आती हो, लेकिन इसकी असल हालत बारिश के साथ सामने आ गई। बिल्डिंग की चारों तरफ से पानी का रिसाव होता है और ओपीडी क्षेत्र की ओर जाने वाली सीढ़ियों के पास लगी फाइबर शीट भी टूट चुकी है। इससे वहां भी पानी भर जाता है। इस बार बारिश इतनी तेज़ थी कि बेसमेंट के साथ-साथ ग्राउंड फ्लोर भी जलमग्न हो गया। अस्पताल में कोई प्रभावी जल निकासी व्यवस्था नजर नहीं आई।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: ऊपर शिफ्ट होंगे मरीज, सितंबर तक नहीं खुलेगा बेसमेंट वार्ड
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डा. नीरज यादव ने कहा कि, “मरीजों की भलाई के लिए हमने तत्काल निर्णय लिया और बेसमेंट से सभी मरीजों को ऊपर शिफ्ट कर दिया गया है। बेसमेंट वार्ड को कम से कम दो महीने यानी सितंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है।”
डा. यादव ने आगे बताया कि यह 30-बेड का वार्ड डी-प्लान के तहत बना था, जिसमें फिलहाल सर्जिकल और ऑर्थोपेडिक मरीजों का इलाज एक साथ किया जा रहा था। मॉनसून के बाद दोनों को अलग-अलग किया जाएगा। अस्पताल में अब 16-बेड का ऑर्थो वार्ड और 30-बेड का सर्जिकल वार्ड स्थापित किया जाएगा।
गंभीर सवाल: जब अस्पताल नहीं बचे बारिश से, तो आम जनता का क्या?
यह घटना सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। गुरुग्राम मानसून जलभराव ने पूरे शहर में अव्यवस्था का चेहरा उजागर किया है। सवाल ये उठता है कि अगर शहर के नागरिक अस्पताल तक जलभराव से सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोगों की बस्तियों, स्कूलों, और निजी क्लिनिक की हालत क्या होगी? जल निकासी की पहले से कोई पुख्ता योजना क्यों नहीं थी?
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