Gurugram, वायरल सच (ब्यूरो): साइबर सिटी में Gurugram Groundwater Crisis लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर में रोजाना 10 करोड़ लीटर यानी 100 एमएलडी से ज्यादा भूजल का दोहन हो रहा है। इसके चलते Gurugram शहर और आसपास के क्षेत्र में वर्ष 2023 से 2026 के बीच भूजल स्तर में औसतन 0.07 मीटर यानी 7 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गिरावट दर्ज की गई है। पेयजल की बढ़ती मांग और भूजल पर निर्भरता के बीच उपचारित पानी के पुन: उपयोग, वर्षा जल संचयन और तालाबों के विकास जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।
2031 तक 1135 एमएलडी पहुंच सकती है पानी की मांग
गुरुग्राम-मानेसर अर्बन कॉम्प्लेक्स में आने वाले वर्षों में पानी की मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है। जीएमडीए के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्लान के अनुसार वर्ष 2031 तक पेयजल की मांग करीब 1135 एमएलडी तक पहुंच सकती है।
वर्तमान में सेक्टर-1 से 115 तक के आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की मांग करीब 815 एमएलडी है। इसके मुकाबले बसई और चंदू बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से करीब 770 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
मांग और उपलब्धता के इस अंतर के कारण शहर में पानी के वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बनी हुई है।
नहर से पानी बढ़ा, ट्यूबवेल पर निर्भरता हुई कम
नहर आधारित पेयजल आपूर्ति बढ़ने के बाद नगर निगम क्षेत्र में ट्यूबवेल से पानी लेने की मात्रा में कमी आई है। पहले जहां करीब 100 एमएलडी पानी ट्यूबवेल से लिया जाता था, अब यह मात्रा घटकर करीब 60 एमएलडी रह गई है।
हालांकि, Gurugram Groundwater Crisis का दबाव अभी भी कम नहीं हुआ है। नगर निगम क्षेत्र में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए 581 बोरवेल भूजल की आपूर्ति कर रहे हैं।
इससे साफ है कि नहर आधारित पानी की आपूर्ति बढ़ने के बावजूद शहर की जल व्यवस्था अभी पूरी तरह भूजल से अलग नहीं हो पाई है।
शहरी क्षेत्र में भूजल पर दबाव ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम शहर और आसपास के क्षेत्र में तीन वर्षों के दौरान भूजल स्तर में औसतन 0.07 मीटर प्रति वर्ष की गिरावट दर्ज की गई। इसके मुकाबले पूरे गुरुग्राम जिले में इसी अवधि के दौरान औसतन 0.02 मीटर प्रति वर्ष की वृद्धि दर्ज की गई।
यानी जिले के ग्रामीण और अन्य क्षेत्रों की तुलना में तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में भूजल पर दबाव अधिक दिखाई दे रहा है।
Gurugram Groundwater Crisis को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम क्षेत्र में वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज से जुड़े उपायों पर भी काम किया जा रहा है।
327 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू
नगर निगम क्षेत्र में 327 पारंपरिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू हैं। इसके अलावा 188 मॉड्यूलर सिस्टम को मंजूरी दी गई है।
इनमें:
- 126 सिस्टम पूरे हो चुके हैं
- 29 सिस्टम पर काम चल रहा है
- 33 सिस्टम लंबित हैं
भूजल दोहन को नियंत्रित करने के लिए अब तक 9 बोरवेल सील किए गए हैं।
408 एमएलडी उपचारित पानी, सिर्फ 202 एमएलडी का दोबारा उपयोग
Gurugram में भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए उपचारित पानी के पुन: उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है।
शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से करीब 408 एमएलडी उपचारित पानी निकल रहा है। हालांकि, इसमें से करीब 202 एमएलडी पानी का ही दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस उपचारित पानी का उपयोग:
- निर्माण कार्यों में
- उद्योगों में
- पार्कों में
- ग्रीन बेल्ट में
- झील और तालाबों में
- सिंचाई के लिए
किया जा रहा है।
यानी उपचारित पानी की उपलब्धता के बावजूद उसका पूरा इस्तेमाल अभी नहीं हो रहा है। इसके बेहतर उपयोग से भूजल पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
2023 से 2026 तक भूजल स्तर की स्थिति
| वर्ष | गुरुग्राम शहर | फरुखनगर | पटौदी | सोहना |
|---|---|---|---|---|
| 2023 | 33.55 मीटर | 22.77 मीटर | 38.25 मीटर | 25.67 मीटर |
| 2024 | 33.76 मीटर | 22.76 मीटर | 38.05 मीटर | 25.71 मीटर |
| 2025 | 33.81 मीटर | 22.73 मीटर | 37.88 मीटर | 25.78 मीटर |
| 2026 | 33.76 मीटर | 22.64 मीटर | 37.74 मीटर | 25.91 मीटर |
इन आंकड़ों से अलग-अलग क्षेत्रों में भूजल की स्थिति में अंतर सामने आता है। गुरुग्राम शहर और आसपास का तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र विशेष रूप से भूजल दबाव का सामना कर रहा है।
73 तालाब विकसित, 28 जलभराव वाले हॉटस्पॉट से जुड़े
जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के लिए गुरुग्राम में तालाबों और जलाशयों को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अब तक 73 तालाब विकसित किए गए हैं। इनमें से 28 तालाबों को वर्ष 2026 में जलभराव वाले हॉटस्पॉट से जोड़ा गया है।
इसके अलावा वजीराबाद झील को घाटा जलाशय से जोड़ने की योजना है। वजीराबाद, चकरपुर और घाटा क्षेत्र में 3 से ज्यादा जलाशय विकसित किए गए हैं।
तालाबों को बरसाती नालों से जोड़ने का काम भी जारी है, ताकि बारिश के पानी को जल संरचनाओं तक पहुंचाकर उसका उपयोग भूजल रिचार्ज के लिए किया जा सके।
मानसून में बारिश के पानी से मिला भूजल रिचार्ज
नए मॉडल रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करने के साथ पुराने सिस्टम को भी दोबारा चालू किया जा रहा है। इस मानसून के दौरान तालाबों में वर्षा जल संचयन होने से भूजल रिचार्ज में मदद मिली है।
यह व्यवस्था एक तरफ बारिश के पानी को संरक्षित करने और दूसरी तरफ शहर के भूजल स्रोतों पर दबाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
2031 की बढ़ती मांग सबसे बड़ी चुनौती
Gurugram में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ पानी की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। 2031 तक 1135 एमएलडी पेयजल मांग का अनुमान शहर की भविष्य की जल व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।
एक तरफ आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे में नहर आधारित पेयजल आपूर्ति बढ़ाना, उपचारित पानी का ज्यादा इस्तेमाल करना और वर्षा जल को संरक्षित करना जरूरी होगा।
Gurugram Groundwater Crisis से निपटने के लिए भूजल दोहन को नियंत्रित करने के साथ-साथ उपलब्ध वैकल्पिक जल स्रोतों का अधिकतम इस्तेमाल करना अहम होगा।
क्या बोले नगर निगम के चीफ इंजीनियर?
नगर निगम गुरुग्राम के चीफ इंजीनियर विजय ढाका ने कहा:
“तालाबों को बरसाती नालों से जोड़ने का कार्य चल रहा है। नए मॉडल रेन वाटर हार्वेस्टिंग निर्माण के साथ ही पुराने सिस्टम को चालू किया जा चुका है। इस बार मानसून के दौरान तालाबों में वर्षा जल संचयन होने से भूजल रिचार्ज में मदद मिली थी।”
गुरुग्राम के सामने पानी की बड़ी चुनौती
Gurugram में रोजाना 10 करोड़ लीटर से ज्यादा भूजल दोहन, बढ़ती पेयजल मांग और शहरी क्षेत्र में भूजल स्तर में सालाना करीब 7 सेंटीमीटर की गिरावट पानी की चुनौती को सामने लाती है।
आने वाले वर्षों में नहर आधारित पानी की आपूर्ति बढ़ाना, उपचारित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ाना, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी बनाना और तालाबों-जलाशयों के जरिए भूजल रिचार्ज बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
अगर शहर की बढ़ती जरूरतों के साथ जल स्रोतों का संतुलित इस्तेमाल किया जाता है, तो Gurugram Groundwater Crisis के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
