Gurugram, वायरल सच (ब्यूरो): साइबर ठगों ने अब गैस कनेक्शन काटने का डर दिखाकर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। गुरुग्राम में फर्जी APK लिंक के जरिए एक व्यक्ति से 1,64,900 रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में Gurugram साइबर थाना पूर्व की पुलिस टीम ने बिहार के बांका जिले से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। Gurugram पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं।
Gurugram पुलिस के अनुसार, आरोपितों की पहचान बांका जिले के सठियारी गांव निवासी निर्मल उर्फ विजय कुमार और पिपराडीह गांव निवासी गोपी कुमार यादव के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल किए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया गया। Gurugram पुलिस मामले में आरोपितों की भूमिका और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।
गैस कनेक्शन काटने का मैसेज भेजकर बनाया शिकार
Gurugram पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को 9 अक्टूबर को व्हाट्सऐप पर एक संदेश मिला। इसमें बताया गया कि उसका गैस बिल बकाया है और समय पर भुगतान नहीं करने पर गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। संदेश में आगे संपर्क करने के लिए एक अन्य मोबाइल नंबर भी दिया गया था।
गैस कनेक्शन बंद होने की आशंका के चलते पीड़ित ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया। इसके बाद उसे व्हाट्सऐप के जरिए एक APK लिंक भेजा गया। लिंक खोलने पर भुगतान पोर्टल जैसा दिखाई देने वाला पेज खुला, जहां केवल 12 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया।
पीड़ित ने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान उसके खाते से 1,64,900 रुपये की धोखाधड़ी हो गई। कम राशि के भुगतान का झांसा देकर इतनी बड़ी रकम निकलने की घटना ने फर्जी भुगतान लिंक के खतरे को उजागर किया है।
बिहार के बांका से दो आरोपित गिरफ्तार
मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पूर्व में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने तकनीकी जांच और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर आरोपितों की पहचान की। इसके बाद टीम ने सोमवार रात बिहार के बांका जिले में कार्रवाई कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया।
Gurugram पुलिस ने उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं। जांच में इन उपकरणों और सिम कार्डों की कथित भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
सिम कार्ड खरीदने और आगे बेचने का खुलासा
Gurugram पुलिस की पूछताछ के अनुसार, निर्मल ने कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति के नाम पर धोखाधड़ी से सिम कार्ड हासिल किए और उन्हें एक हजार रुपये प्रति सिम के हिसाब से गोपी को दिया। इसके बाद गोपी ने वही सिम कार्ड कथित तौर पर 1,500 रुपये प्रति सिम में आगे बेच दिए।
Gurugram पुलिस के अनुसार, आरोपित पहले भी साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड बेच चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन अन्य मामलों में किया गया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी इसमें शामिल हैं या नहीं।
फर्जी APK लिंक से ऐसे बचें
साइबर अपराधी अक्सर बिजली बिल, गैस बिल, बैंक खाते या मोबाइल सेवाएं बंद होने का डर दिखाकर लोगों को जल्दबाजी में कदम उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके बाद उन्हें किसी लिंक पर क्लिक करने, ऐप डाउनलोड करने या भुगतान संबंधी जानकारी दर्ज करने के लिए कहा जाता है।
ऐसी ठगी से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
- अनजान APK फाइल डाउनलोड न करें: व्हाट्सऐप या एसएमएस पर मिले संदिग्ध लिंक से ऐप इंस्टॉल करने से बचें।
- गैस बिल की आधिकारिक पुष्टि करें: कनेक्शन काटने का संदेश मिलने पर संबंधित गैस कंपनी के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या सत्यापित ग्राहक सेवा नंबर से जानकारी लें।
- क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा न करें: अनजान वेबसाइट पर कार्ड नंबर, CVV, OTP या बैंकिंग विवरण दर्ज न करें।
- कम राशि के भुगतान के झांसे से सावधान रहें: 12 रुपये जैसे छोटे भुगतान के नाम पर भेजे गए संदिग्ध लिंक को भी सत्यापित किए बिना न खोलें।
- ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: बैंक या कार्ड जारी करने वाली संस्था को तुरंत सूचित करें और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। ऑनलाइन शिकायत आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।

Gurugram के इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। नागरिकों को सलाह है कि गैस कनेक्शन या किसी अन्य सेवा को बंद करने की धमकी देने वाले अनजान संदेशों पर भरोसा करने के बजाय संबंधित कंपनी से सीधे पुष्टि करें।
