गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): साइबर सिटी गुरुग्राम में धूल प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता बनता जा रहा है। वाहनों के धुएं के साथ-साथ टूटी सड़कों, निर्माण स्थलों और सड़क किनारे जमा मिट्टी से उड़ने वाली धूल भी वायु प्रदूषण बढ़ा रही है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ओर से साझा किए गए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में PM10 का स्तर राष्ट्रीय वार्षिक मानक से करीब 2.75 गुना अधिक दर्ज किया गया है।
23 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में PM10 का स्तर 164.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जबकि राष्ट्रीय वार्षिक मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यह स्थिति शहर में सड़क रखरखाव, निर्माण गतिविधियों और धूल नियंत्रण के उपायों को प्रभावी बनाने की आवश्यकता को दर्शाती है।
2019 से राष्ट्रीय मानक से ऊपर बना हुआ है PM10
CPCB के आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में वर्ष 2019 से PM10 का स्तर लगातार राष्ट्रीय वार्षिक मानक से ऊपर रहा है। उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि शहर में धूल प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
वर्षवार दर्ज PM10 स्तर इस प्रकार रहा:
- 2019: 190.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
- 2020: 148.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
- 2022: 196.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
- 2025: 159.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
- 23 अक्टूबर 2026 तक: 164.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग वर्षों में उतार-चढ़ाव के बावजूद PM10 का स्तर निर्धारित वार्षिक मानक से काफी ऊपर रहा है। वर्ष 2022 में यह 196.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया था।
टूटी सड़कें और निर्माण स्थल बन रहे धूल प्रदूषण के प्रमुख कारण
गुरुग्राम में तेजी से हो रहे शहरी विकास के बीच निर्माण कार्य, टूटी सड़कें और सड़क किनारे जमा मिट्टी धूल प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। वाहनों की आवाजाही से सड़क पर जमी मिट्टी और धूल दोबारा हवा में फैल जाती है।
इसके अलावा, अधूरे फुटपाथ, खुले में निर्माण सामग्री का परिवहन, निर्माण स्थलों से निकलने वाले कण और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रदूषण बढ़ा सकती हैं।
सड़क किनारे जमा मिट्टी का नियमित उठान नहीं होने और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के पर्याप्त इंतजाम न होने से समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में नगर निगम, संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों के लिए धूल नियंत्रण के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है।
PM10 के कण फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं
PM10 ऐसे सूक्ष्म कण हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। सांस के साथ शरीर में प्रवेश करने पर ये श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं और कुछ कण फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं।
इन कणों के अधिक संपर्क में रहने से आंखों और गले में जलन, खांसी तथा सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
धूल प्रदूषण से बचाव के लिए अत्यधिक धूल वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रहने से बचना, स्थानीय वायु गुणवत्ता संबंधी सलाह का पालन करना और जरूरत के अनुसार उपयुक्त सुरक्षा उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।
हरियाणा के दूसरे शहरों में भी PM10 का स्तर ऊंचा
23 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों में हरियाणा के कई अन्य शहरों में भी PM10 का स्तर राष्ट्रीय वार्षिक मानक से अधिक दर्ज किया गया।
| शहर | PM10 स्तर (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) |
|---|---|
| बल्लभगढ़ | 195.1 |
| गुरुग्राम | 164.9 |
| फरीदाबाद | 144.1 |
| धारूहेड़ा | 123.9 |
| मानेसर | 121.2 |
| भिवानी | 91.9 |
| पलवल | 79.8 |
राष्ट्रीय वार्षिक मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। इन आंकड़ों के अनुसार, सूची में शामिल सभी शहरों का PM10 स्तर इस मानक से ऊपर था।
वर्ष 2025 में धारूहेड़ा में PM10 का स्तर 277.8 और मानेसर में 196.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था। यह आंकड़े क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या पर लगातार निगरानी और प्रभावी नियंत्रण उपायों की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
सड़क सर्वे में मिली थीं 258 खामियां
सड़क की स्थिति और धूल प्रदूषण के संबंध को लेकर 26 दिसंबर 2025 के निरीक्षण में 125 सड़कों का आकलन किया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 34 सड़कों पर बहुत अधिक धूल, 58 पर मध्यम धूल और 29 पर कम धूल पाई गई थी। केवल चार सड़कें धूल मुक्त बताई गई थीं।
इस सर्वे के निष्कर्ष सड़क सफाई, मरम्मत और धूल नियंत्रण की आवश्यकता की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में 258 खामियों का पूरा वर्गीकरण और निरीक्षण के बाद की कार्रवाई का विवरण स्पष्ट नहीं है।
सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत, सड़क किनारे जमा मिट्टी हटाने और नियमित सफाई से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए विभागों को निरीक्षण के साथ सुधार कार्यों की नियमित निगरानी भी करनी होगी।
धूल प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी हैं ये कदम
गुरुग्राम में धूल प्रदूषण को कम करने के लिए निर्माण स्थलों, सड़कों और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रभावी उपाय अपनाने की जरूरत है।
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण: निर्माण सामग्री को ढककर रखना और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव करना।
- सामग्री का सुरक्षित परिवहन: रेत, मिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री को ढककर ले जाना।
- सड़क सफाई और मरम्मत: टूटी सड़कों की मरम्मत करना तथा सड़क किनारे जमा मिट्टी को नियमित रूप से हटाना।
- मलबे पर निगरानी: खुले में मलबा डालने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना।
- औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण: औद्योगिक इकाइयों और रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) संयंत्रों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जांच करना।
- नियमित निगरानी: प्रदूषण के आंकड़ों का आकलन कर प्रभावित क्षेत्रों में सुधारात्मक कदम उठाना।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए जवाबदेही और निगरानी जरूरी
गुरुग्राम में PM10 का स्तर राष्ट्रीय वार्षिक मानक से काफी अधिक रहने के आंकड़े बताते हैं कि धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। सड़क निर्माण और मरम्मत के साथ निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन, मलबे का उचित निस्तारण और सड़क सफाई पर भी ध्यान देना होगा।
धूल प्रदूषण में कमी लाने के लिए केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण, खामियों को दूर करने और नियमों के पालन की निगरानी पर जोर देना होगा। इससे शहर में वायु गुणवत्ता सुधारने और लोगों को धूल के अत्यधिक संपर्क से बचाने में मदद मिल सकती है।
