नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): चुनावी अधिकारों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर जारी विरोध के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके और अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यह आंदोलन उन आम और गरीब नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़ा है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। दोनों नेताओं ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में संयुक्त पत्रकार वार्ता कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, फिल्म अभिनेता प्रकाश राज, वामपंथी छात्र संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी रही। नेहा बोरा के संबोधन के बाद कार्यक्रम में हंगामा होने की बात सामने आई। वार्ता के दौरान वक्ताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), प्रदर्शनकारियों की हिरासत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी बातें रखीं।
नेहा बोरा बोलीं—आम लोगों के मतदान अधिकारों से जुड़ा है आंदोलन
नेहा बोरा ने कहा कि चुनावी अधिकारों की लड़ाई किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है। उन्होंने इसे उन आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप है।
बोरा ने दावा किया कि 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। यह आंकड़ा उनके संबोधन में प्रस्तुत किया गया दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी एक संगठन के बैनर या झंडे तक सीमित नहीं है और देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस मुद्दे को उठा रहे हैं।
उन्होंने कर्नाटक के फ्रीडम पार्क, दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के आजाद मैदान जैसे स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी अधिकारों को लेकर विरोध जारी है। उनके मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य आम नागरिकों के मतदान अधिकारों और मतदाता सूची में नाम शामिल रहने से जुड़े सवालों को सामने लाना है।
CJP के दो प्रवक्ताओं की न्यायिक हिरासत पर जताई नाराजगी
नेहा बोरा ने CJP के प्रवक्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से चुनावी अधिकारों से जुड़े मुद्दे समाप्त नहीं होंगे।
बोरा ने कार्रवाई को आंदोलन की आवाज दबाने का प्रयास बताया। हालांकि, हिरासत से संबंधित मामले में आरोपों, न्यायालय के आदेश और संबंधित कानूनी प्रक्रिया का अलग-अलग तथ्यों के आधार पर आकलन किया जाना आवश्यक है।
अभिजीत दीपके ने दिल्ली में पुलिस तैनाती पर उठाए सवाल
CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने दिल्ली में पुलिस की भारी तैनाती और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 15 दिनों के दौरान छात्रों, युवा संगठनों और विपक्षी नेताओं को विरोध प्रदर्शनों के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
CJP अभिजीत दीपके ने ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि विरोध करने वालों के साथ सख्ती बरती जा रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा।
उन्होंने 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के आह्वान का जिक्र करते हुए रेलवे और दिल्ली मेट्रो सेवाओं तथा राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी दावे किए। इन बयानों में लगाए गए आरोपों और सुरक्षा संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
प्रशांत भूषण ने चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग का किया उल्लेख
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि विपक्ष की मांग चुनाव प्रक्रिया में सुधार से जुड़ी है। उन्होंने सरकार की ओर से विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर चर्चा होनी चाहिए।
भूषण ने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रही तो राजनीतिक परिस्थितियों पर इसका असर पड़ सकता है। उनका संबोधन चुनावी प्रक्रिया, विरोध प्रदर्शन और सरकार की प्रतिक्रिया के बीच चल रही बहस पर केंद्रित रहा।
प्रकाश राज ने 200 से अधिक संगठनों के समर्थन का दावा किया
फिल्म अभिनेता प्रकाश राज ने दावा किया कि देशभर के 200 से अधिक संगठन, जिनमें किसान समूह, श्रमिक संघ और सिविल सोसाइटी संगठन शामिल हैं, युवाओं के साथ इस CJP आंदोलन में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध की आवाज को दबाने की कोशिशों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा।
प्रकाश राज ने यह भी बताया कि पुलिस कार्रवाई और कथित अवैध हिरासत से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए वकीलों के एक समूह ने स्वतंत्र समिति बनाई है। उनके अनुसार, इस समिति में पटना उच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और दिल्ली से आए 100 से अधिक लोग जवाहर भवन में समिति के समक्ष अपनी शिकायतें और सबूत प्रस्तुत कर रहे हैं। इस समिति की संरचना, उसके सदस्यों और प्रस्तुत शिकायतों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप, गिरफ्तारी की मांग
प्रकाश राज ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सबूत मिटाने का आरोप लगाते हुए उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने CJP प्रदर्शन के दौरान छात्रों, महिलाओं और मीडिया कर्मियों पर कथित लाठीचार्ज की निंदा भी की।
ये आरोप वक्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इनके संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष, उपलब्ध दस्तावेज और जांच की स्थिति सामने आने पर ही पूरे मामले का तथ्यात्मक आकलन किया जा सकता है।
SIR प्रक्रिया और इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है विरोध
प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) प्रक्रिया को रोकने की मांग शामिल है। विपक्षी दलों, CJP और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों का समाधान किया जाना चाहिए।
इस विवाद के केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखने जैसे मुद्दे हैं। दूसरी ओर, मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, लागू नियमों और संबंधित पक्षों के दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
नई दिल्ली में हुई संयुक्त पत्रकार वार्ता के दौरान नेताओं और वक्ताओं ने अपने आरोप तथा मांगें सामने रखीं। आने वाले समय में इस विवाद की दिशा संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
