नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने वाले E20 Fuel को लेकर हो रहे विरोध पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि E20 के खिलाफ पैसे देकर प्रोपेगेंडा चलाया गया और इस मुद्दे पर बेवजह शोर मचाया गया। उनका यह बयान केंद्र सरकार की ओर से E100 Fuel के इस्तेमाल के लिए नियमों में बदलाव अधिसूचित किए जाने के एक दिन बाद आया है।
गडकरी बोले- E20 को लेकर बेवजह शोर मचाया गया
गडकरी ने उद्योग संगठन CII के एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से बड़ी संख्या में कारें और दोपहिया वाहन E20 मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस ईंधन को लेकर कुछ समय पहले काफी विरोध हुआ था, लेकिन अब यह चर्चा कम हो गई है। उन्होंने विरोध को पेड प्रोपेगेंडा करार दिया।
मंत्री ने कहा कि देश में वैकल्पिक ईंधन के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक, इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार ने E100 Fuel के लिए बदले नियम
केंद्र सरकार ने 26 अक्टूबर को Central Motor Vehicles Rules, 1989 में संशोधन अधिसूचित किया। इसके तहत विशेष रूप से तैयार किए गए Flex-Fuel Vehicles को E100 तक के ईंधन मिश्रण पर चलाने के लिए नियामकीय रास्ता स्पष्ट किया गया है।
Ethanol मिश्रित पेट्रोल में E20 का अर्थ है 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल। वहीं E100 लगभग शुद्ध एथेनॉल वाला ईंधन है। इन दोनों के इस्तेमाल के लिए वाहन की तकनीकी क्षमता और निर्माता की मंजूरी महत्वपूर्ण है।
हर पेट्रोल कार में नहीं डाल सकते E100
सरकार के नए नियमों का अर्थ यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल या E20 के लिए तैयार हर कार में E100 इस्तेमाल किया जा सकता है। E85 और E100 का इस्तेमाल केवल उन वाहनों में किया जाना चाहिए, जिन्हें निर्माता विशेष रूप से इन ईंधनों के अनुकूल Flex-Fuel Vehicles के रूप में तैयार करता है।
Ethanol आधारित ईंधन को लेकर वाहन चालकों के बीच इंजन की अनुकूलता, माइलेज और रखरखाव से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। इसलिए वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन के निर्माता की गाइडलाइन और निर्धारित ईंधन मानकों के अनुसार ही ईंधन का चुनाव करें।
एथेनॉल नीति पर क्यों हो रही है चर्चा
केंद्र सरकार ने पेट्रोल में Ethanol Blending को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की नीति के हिस्से के रूप में आगे बढ़ाया है। सरकार ने जुलाई 2026 में जारी अपने बयान में कहा था कि E20 के प्रदर्शन और अनुकूलता को लेकर तकनीकी संस्थानों तथा वाहन उद्योग के साथ अध्ययन और परीक्षण किए गए हैं।
हालांकि, गडकरी का यह आरोप कि E20 के विरोध के लिए पैसे देकर अभियान चलाया गया, उनका बयान है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। Ethanol मिश्रित ईंधन पर बहस में वाहन की तकनीकी अनुकूलता और उपभोक्ताओं की वास्तविक शिकायतों का आकलन भी महत्वपूर्ण है।
वाहन चालकों के लिए जरूरी जानकारी
वाहन मालिकों को अपने वाहन की पुस्तिका में दिए गए ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए। यदि माइलेज, इंजन के प्रदर्शन या रखरखाव को लेकर कोई समस्या आती है, तो अधिकृत सर्विस सेंटर और संबंधित तेल विपणन कंपनी के शिकायत निवारण माध्यमों से जानकारी लेनी चाहिए।
Ethanol आधारित ईंधन के विस्तार के साथ वाहन निर्माताओं, ईंधन कंपनियों और नियामक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। वहीं E100 की उपलब्धता और उपयोग को लेकर यह स्पष्ट रहना चाहिए कि नए नियम विशेष रूप से अनुकूल वाहनों पर लागू होते हैं, सभी पेट्रोल वाहनों पर नहीं।
