गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): 22 हरियाणा में पैरलल लाइसेंस देने के प्रस्ताव के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने गुरुवार से तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी Strike शुरू कर दी है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, प्रदेश के चारों बिजली निगमों के करीब 40 हजार कर्मचारी और इंजीनियर इस आंदोलन में शामिल हैं। संगठनों ने दावा किया है कि Strike के कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक उत्पादन और बिजली संबंधी शिकायतों के निवारण में परेशानी आ रही है।
यह Strike मुख्य रूप से गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस देने के प्रस्ताव के विरोध में किया जा रहा है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा का कहना है कि इस व्यवस्था से सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनियों और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी हड़ताल वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी के लिए नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध करने के लिए है।
33 केवी और 11 केवी फीडरों पर बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का दावा
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, Strike के दौरान प्रदेश में 33 केवी और 11 केवी के कई फीडरों की बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। संगठनों का दावा है कि कुछ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित नहीं हो पा रही है।
फीडरों के माध्यम से गांवों, रिहायशी इलाकों, बाजारों और औद्योगिक क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाई जाती है। किसी फीडर के बंद होने या तकनीकी खराबी आने से उससे जुड़े उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, प्रभावित फीडरों की कुल संख्या और बिजली कटौती से प्रभावित उपभोक्ताओं का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए बिजली आपूर्ति पर पड़े वास्तविक असर का आकलन क्षेत्रवार जानकारी मिलने के बाद ही किया जा सकेगा।
बिजली संकट से पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका
बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल, पंपिंग स्टेशन और मोटर चालित प्रणालियों के जरिए पानी की आपूर्ति की जाती है। बिजली उपलब्ध नहीं होने पर पानी की टंकियां भरने और घरों तक पानी पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
कर्मचारी संगठनों ने दावा किया है कि प्रदेश के कुछ हिस्सों में बिजली बाधित होने से पानी की समस्या पैदा हुई है। हालांकि, पेयजल आपूर्ति कितने क्षेत्रों में प्रभावित हुई और इसकी गंभीरता कितनी है, इस संबंध में क्षेत्रवार आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं।
औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने की बात
Strike के दौरान औद्योगिक फीडरों पर बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ने का दावा किया गया है। बिजली की नियमित उपलब्धता मशीनों के संचालन और उत्पादन प्रक्रिया के लिए जरूरी है। आपूर्ति बाधित होने पर उत्पादन की समय-सारिणी और औद्योगिक गतिविधियों में परेशानी हो सकती है।
कर्मचारी संगठनों ने औद्योगिक इकाइयों में कामकाज प्रभावित होने की बात कही है। हालांकि, कितनी इकाइयों में उत्पादन बंद हुआ और इससे कितना आर्थिक नुकसान हुआ, इसकी स्वतंत्र पुष्टि या सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
शिकायत केंद्रों और सब स्टेशनों के कामकाज पर असर
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, Strike का असर बिजली शिकायत केंद्रों, सब स्टेशनों, सब डिवीजनों और बिजली निगमों के विभिन्न कार्यालयों पर भी पड़ा है। संगठनों ने हिसार और पंचकूला स्थित बिजली निगम मुख्यालयों में भी हड़ताल के व्यापक असर का दावा किया है।
ट्रांसफार्मर की खराबी, फ्यूज उड़ने और अन्य तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए कर्मचारियों की जरूरत होती है। ऐसे में पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने पर शिकायतों के समाधान में देरी हो सकती है।
हालांकि, सभी शिकायत केंद्रों और सब स्टेशनों के पूरी तरह बंद होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र की बिजली आपूर्ति और शिकायत निवारण की स्थिति के लिए संबंधित बिजली निगम की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
गुरुग्राम और नूंह में पैरलल लाइसेंस का मुद्दा
Strike का प्रमुख कारण गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस देने का प्रस्ताव है। कर्मचारी संगठन इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं और इसे सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम मानते हैं।
पैरलल लाइसेंस की व्यवस्था में नियामकीय नियमों और निर्धारित शर्तों के तहत किसी क्षेत्र में मौजूदा बिजली वितरण लाइसेंसधारी के साथ दूसरे लाइसेंसधारी को भी बिजली वितरण की अनुमति दी जा सकती है। इसका वास्तविक स्वरूप संबंधित नियामकीय मंजूरी और लाइसेंस की शर्तों पर निर्भर करता है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस व्यवस्था से सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनियों, कर्मचारियों और मौजूदा वितरण प्रणाली पर असर पड़ सकता है। उनकी मांग है कि सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे और बिजली उपभोक्ताओं तथा सार्वजनिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले।
किसान और कर्मचारी संगठनों ने दिया समर्थन
Strike का आह्वान हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने किया है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, नियमित और अनुबंध कर्मचारियों की यूनियनों के साथ इंजीनियर एसोसिएशन भी आंदोलन में शामिल हैं।
संगठनों ने दावा किया है कि विभिन्न स्थानों पर Strike के समर्थन में प्रदर्शन किए गए। आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा के अधिकांश घटक संगठनों, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और मजदूर संगठनों सीटू, एटक, इंटक तथा एआईयूटीयूसी का समर्थन मिलने की बात भी कही गई है।
इन संगठनों ने बिजली कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए बिजली वितरण व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव का विरोध जताया है।
40 हजार कर्मचारियों की भागीदारी का दावा
इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने दावा किया कि प्रदेश के चारों बिजली निगमों के करीब 40 हजार कर्मचारी और इंजीनियर Strike में शामिल हैं।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सदस्य देवेंद्र सिंह हुड्डा, रविंद्र घणगस, इकबाल चांदना, बिजेंद्र सिंह बराड़, बलजीत बेनीवाल, सुरेश राठी, यशपाल देसवाल और राजेश सिरोही ने Strike को सफल बताते हुए सरकार से पैरलल लाइसेंस के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कर्मचारी संगठनों की ओर से दिए गए कर्मचारियों की संख्या और Strike के प्रभाव संबंधी आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
वेतन-भत्तों के लिए नहीं, बिजली व्यवस्था के मुद्दे पर आंदोलन
मोर्चे के वरिष्ठ सदस्य देवेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी के लिए Strike नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में जाने से बचाना है।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने और पैरलल लाइसेंस के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की है। वहीं, Strike के दौरान बिजली आपूर्ति और आवश्यक सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता भी महत्वपूर्ण है।
तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान स्थिति पर नजर
22 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई Strike तीन दिनों के लिए घोषित की गई है। आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति, तकनीकी खराबियों के निवारण और पेयजल व्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर नजर रहेगी।
फिलहाल, प्रभावित फीडरों की वास्तविक संख्या, बिजली बहाली की स्थिति और सरकार की अगली कार्रवाई से संबंधित आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी। Strike को लेकर कर्मचारी संगठनों के दावों और स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
