Meerut Blue Drum Murder Case: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, मुस्कान पहली महिला होगी मेरठ में फांसी पाने वाली

Meerut, वायरल सच (ब्यूरो): उत्तर प्रदेश के Meerut में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या और उनके शव को नीले ड्रम में छिपाने के मामले ने देशभर में लोगों का ध्यान खींचा था। करीब 13 महीने तक चली सुनवाई, 126 अदालती तारीखों और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों की गवाही के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराए जाने के पश्चात सजा सुनाई। इस फैसले के साथ ही चर्चित Meerut Blue Drum Murder Case एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव पर पहुंच गया है।

मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड

Meerut की जिला एवं सत्र अदालत में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने मामले में सजा सुनाई। अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या तथा साक्ष्य मिटाने से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराए जाने के बाद मृत्युदंड दिया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने भारतीय दंड संहिता की हत्या से संबंधित धारा 302 के तहत दोनों पर 50-50 हजार रुपये और साक्ष्य मिटाने से संबंधित धारा 238(ए) के तहत 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस प्रकार रिपोर्ट किए गए जुर्माने की कुल राशि दोनों दोषियों के लिए मिलाकर 1.40 लाख रुपये है।

अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर अपना फैसला सुनाया। Meerut Blue Drum Murder Case में यह निर्णय लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का अहम परिणाम माना जा रहा है।

नीले ड्रम वाला हत्याकांड

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव को क्षत-विक्षत कर एक नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपाया गया था। ड्रम में सीमेंट और अन्य सामग्री भरकर शव को छिपाने की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसी वजह से यह मामला मीडिया में ‘ब्लू ड्रम मर्डर केस’ के नाम से चर्चित हुआ।

जांच के दौरान पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के प्रयास किए गए थे। मामले की जांच में जुटाई गई सामग्री, फोरेंसिक साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों को मुकदमे का हिस्सा बनाया गया।

इस घटना ने लोगों को इसलिए भी झकझोर दिया क्योंकि मृतक सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान ही इस मामले में दोषी ठहराई गईं। साहिल शुक्ला को भी हत्या में शामिल होने का दोषी पाया गया। हालांकि, अपराध की परिस्थितियों से जुड़े निष्कर्षों का आधार अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य और न्यायिक निर्णय हैं।

126 सुनवाइयों के बाद आया फैसला

Meerut Blue Drum Murder Case की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमे में कुल 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों की गवाही दर्ज की गई।

30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के सवाल पर सुनवाई हुई और 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

अदालत में फैसला सुनाए जाने के दौरान महाभारत का उल्लेख करते हुए दंड और धर्म के संबंध पर भी टिप्पणी किए जाने की जानकारी सामने आई। अभियोजन पक्ष के वकील के मुताबिक, अदालत ने अपराध की गंभीरता के अनुरूप दंड देने के सिद्धांत पर जोर दिया।

महिला को फांसी की सजा मिलने का मामला क्यों चर्चा में

मुस्कान रस्तोगी को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या उन्हें भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला माना जाएगा। इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

मृत्युदंड सुनाया जाना और वास्तव में फांसी दिया जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। भारत में इससे पहले भी महिलाओं को अदालतों द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के मामले सामने आ चुके हैं। इसलिए मुस्कान को देश में मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला बताना सही नहीं होगा।

Meerut के इस मामले में मुस्कान और साहिल दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सजा पर तत्काल अमल हो जाएगा। मृत्युदंड के मामलों में कानून के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि सहित लागू न्यायिक प्रक्रियाओं और उपलब्ध अपील संबंधी उपायों का पालन किया जाता है।

इसलिए फिलहाल मुस्कान को ‘फांसी पाने वाली पहली महिला’ कहने के बजाय यह कहना अधिक सटीक है कि वह Meerut के चर्चित हत्याकांड में मृत्युदंड पाने वाली महिला दोषियों में शामिल हैं। Meerut Blue Drum Murder Case का फैसला अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन आगे की कानूनी प्रक्रिया भी उतनी ही अहम होगी।

पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद

सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके परिवार को लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। मामले में दोषसिद्धि के बाद परिवार की ओर से कड़ी सजा की मांग की गई थी। अदालत के मृत्युदंड के फैसले के बाद इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक प्रमुख चरण पूरा हुआ है।

ऐसे मामलों में न्याय का उद्देश्य केवल दोषियों को दंड देना नहीं, बल्कि कानून के शासन और न्यायिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना भी है। साथ ही, किसी भी गंभीर आपराधिक मामले में निष्पक्ष सुनवाई और कानून के तहत उपलब्ध सभी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक रहता है।

Meerut

अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के फैसले पर लागू कानून के अनुसार उच्च न्यायालय की पुष्टि और अन्य उपलब्ध कानूनी उपायों की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। अंतिम स्थिति इन प्रक्रियाओं के परिणाम पर निर्भर करेगी।

Meerut Blue Drum Murder Case ने एक बार फिर गंभीर अपराधों की जांच, फोरेंसिक साक्ष्यों, न्यायिक सुनवाई और दंड प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है। 14 अक्टूबर को सुनाया गया फैसला मामले में एक बड़ा घटनाक्रम है, लेकिन वास्तविक फांसी के संबंध में अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

Meerut का यह हत्याकांड लंबे समय तक अपनी गंभीर परिस्थितियों और अदालत के फैसले के कारण चर्चा में रह सकता है। फिलहाल इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण खबर यही है कि अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles