शुभि केसरीवानी की जल संरक्षण मुहिम: Gurugram में बदली सोच, बनीं प्रेरणा

Gurugram, वायरल सच (ब्यूरो): Gurugram में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच जल संकट, गिरता भूजल स्तर, सिमटते तालाब और बारिश के दौरान जलभराव जैसी चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। ऐसे समय में Gurugram की शुभि केसरीवानी ने जल संरक्षण को अपने काम का केंद्र बनाते हुए पानी बचाने के लिए व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान विकसित करने की दिशा में काम किया है। गुरुजल संस्था की सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में उनकी पहल तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षाजल संचयन और अपशिष्ट जल के उपचार एवं पुनः उपयोग पर केंद्रित है।

उनके काम का मुख्य उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण या सफाई करना नहीं, बल्कि पानी को स्थानीय स्तर पर संचित करने, भूजल पुनर्भरण बढ़ाने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की व्यवस्था विकसित करना है। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि जल संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रशासनिक सहयोग और सामुदायिक भागीदारी भी जरूरी है।

सतत विकास की शिक्षा से जल संरक्षण तक का सफर

शुभि केसरीवानी ने अमेरिका के प्रतिष्ठित कोलंबिया विश्वविद्यालय से सतत विकास प्रबंधन में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 2021 में इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया और 2022 में अपनी पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने भारतीय विद्यार्थियों के संगठन की अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

सतत विकास से जुड़ी शिक्षा ने पर्यावरणीय समस्याओं को व्यापक दृष्टिकोण से समझने में मदद की। जल संकट जैसी चुनौती का समाधान केवल तकनीकी उपायों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए वित्तीय संसाधनों का उचित प्रबंधन, प्रशासनिक संस्थाओं के साथ तालमेल और स्थानीय समुदायों की जरूरतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।

इसी सोच के साथ शुभि ने जल संरक्षण को ऐसे कार्यक्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाया, जिसमें पर्यावरणीय जरूरतों और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जा सके। Gurugram जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह दृष्टिकोण विशेष महत्व रखता है, जहां बढ़ती आबादी और निर्माण गतिविधियों के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।Gurugram

Gurugram और फरीदाबाद में 80 से अधिक तालाबों के पुनर्जीवन से जुड़े प्रस्ताव

गुरुजल ने Gurugram और फरीदाबाद में 80 से अधिक तालाबों के पुनर्जीवन से संबंधित प्रस्ताव तैयार किए। इन प्रयासों का उद्देश्य तालाबों से गाद और कचरा हटाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें फिर से जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के योग्य बनाना भी था।

तालाब किसी भी क्षेत्र की जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे बारिश के पानी को रोकने, स्थानीय जल चक्र को बनाए रखने और भूजल स्तर को सहारा देने में भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन अतिक्रमण, कचरे, गाद और उचित रखरखाव की कमी के कारण अनेक जल निकाय अपनी उपयोगिता खो देते हैं।

तालाबों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया में स्थानीय परिस्थितियों को समझना, पानी के प्रवाह का आकलन करना और जल की गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक होता है। प्राकृतिक जल उपचार तकनीकों और स्थानीय वनस्पतियों का उपयोग भी इस दिशा में सहायक हो सकता है।

शुभि केसरीवानी और गुरुजल की पहल इसी व्यापक सोच पर आधारित है कि जल निकायों को केवल जमीन के एक हिस्से के रूप में नहीं, बल्कि शहरी पर्यावरण और जल सुरक्षा की महत्वपूर्ण संरचना के रूप में देखा जाए।

वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज जल प्रबंधन के आंकड़े

गुरुजल की वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में संस्था की 18 सक्रिय परियोजनाओं पर काम किया गया। रिपोर्ट में जल प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े दर्ज किए गए हैं।

इनके अनुसार, परियोजनाओं से प्रतिवर्ष 2.526 करोड़ लीटर भूजल पुनर्भरण, 6.39 करोड़ लीटर अपशिष्ट जल के उपचार एवं पुनः उपयोग और 54 लाख लीटर वर्षाजल प्रबंधन से संबंधित क्षमता का उल्लेख किया गया है।

ये आंकड़े जल संरक्षण के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। भूजल पुनर्भरण का उद्देश्य जमीन के भीतर पानी पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करना है। अपशिष्ट जल का उपचार और दोबारा उपयोग करने से ताजे पानी की मांग कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, वर्षाजल प्रबंधन बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोकने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

इन आंकड़ों को परियोजनाओं की रिपोर्ट में दर्ज क्षमता और उपलब्धियों के संदर्भ में समझना जरूरी है। वास्तविक प्रभाव स्थानीय जलविज्ञान, परियोजना के संचालन, रखरखाव और समय के साथ होने वाले बदलावों पर भी निर्भर करता है।

वर्षाजल संचयन और अपशिष्ट जल का दोबारा उपयोग

वर्षाजल संचयन जल संरक्षण का ऐसा उपाय है, जिसे घरों, संस्थानों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिसरों में अपनाया जा सकता है। छतों तथा खुले क्षेत्रों से बारिश के पानी को एकत्र कर उचित व्यवस्था के माध्यम से जमीन में पहुंचाया जा सकता है या जरूरत के अनुसार उसका उपयोग किया जा सकता है।

इसके लिए जल संचयन संरचनाओं का सही डिजाइन, पानी की गुणवत्ता और नियमित रखरखाव जरूरी है। यदि वर्षाजल को वैज्ञानिक तरीके से संग्रहित किया जाए, तो इससे स्थानीय जल उपलब्धता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।

इसी तरह, अपशिष्ट जल का उपचार कर उसे गैर-पेय कार्यों में दोबारा उपयोग करना भी जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपचारित पानी का उपयोग उपयुक्त मानकों के अनुसार बागवानी, सफाई और अन्य निर्धारित कार्यों में किया जा सकता है। इससे उन कामों में पीने योग्य पानी की खपत घटाने की संभावना बनती है, जहां उपचारित पानी का सुरक्षित उपयोग संभव है।

गुरुजल की परियोजनाओं में इन उपायों पर ध्यान देना इस बात को दर्शाता है कि जल संकट से निपटने के लिए केवल पानी के नए स्रोत तलाशना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि मौजूदा संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना भी आवश्यक है।

जल सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

Gurugram में बढ़ते शहरीकरण के बीच जल संरक्षण की चुनौती लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। गिरते भूजल स्तर, जल निकायों पर दबाव और बारिश के पानी के प्रबंधन की जरूरत को देखते हुए दीर्घकालिक योजना और स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।

शुभि केसरीवानी की पहल और गुरुजल का काम इस दिशा में तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षाजल संचयन, अपशिष्ट जल के उपचार और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका को सामने लाता है। Gurugram में इन प्रयासों का व्यापक महत्व इस विचार में है कि पानी बचाना केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा से जुड़ा सामूहिक दायित्व है।Gurugram

Gurugram में  जल संरक्षण के लिए प्रशासन, विशेषज्ञों, संस्थाओं, नागरिक समूहों और आम लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए योजनाओं के साथ-साथ उनकी नियमित निगरानी, रखरखाव और लोगों की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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