गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): सेक्टर-29 स्थित किंगडम ऑफ ड्रीम्स की जमीन लीज से जुड़ा मामला लोकायुक्त की रिपोर्ट सामने आने के बाद फिर चर्चा में है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की 5.66 एकड़ जमीन की लीज से जुड़े इस प्रकरण में लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरि पाल वर्मा (सेवानिवृत्त) की रिपोर्ट में सरकार को 434.02 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का उल्लेख किया गया है।
लोकायुक्त की रिपोर्ट में संबंधित कंपनी से नुकसान की भरपाई के लिए राशि की वसूली करने तथा मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में इस प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की आवश्यकता का भी उल्लेख किया गया है।
2009 में 15 साल के लिए लीज पर मिली थी जमीन
मामले से जुड़े न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, ग्रेट इंडियन नौटंकी कंपनी ने अदालत में बताया था कि उसे वर्ष 2009 में एचएसवीपी की 5.66 एकड़ जमीन 15 वर्ष की अवधि के लिए लीज पर मिली थी। इसी जमीन पर किंगडम ऑफ ड्रीम्स परियोजना विकसित की गई थी।
कंपनी ने अदालत में कहा था कि परियोजना के विकास में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया। बाद में कंपनी ने एचएसवीपी द्वारा लीज समाप्त करने के फैसले को चुनौती दी और प्राधिकरण की ओर से बताए गए 107.15 करोड़ रुपये के बकाये को गलत बताया।
107.15 करोड़ रुपये के बकाये को लेकर विवाद
एचएसवीपी की ओर से अदालत में कहा गया था कि कंपनी ने लंबे समय तक किंगडम ऑफ ड्रीम्स की जमीन की लीज किराये का भुगतान नहीं किया। प्राधिकरण के अनुसार, जून 2022 तक किराया और ब्याज मिलाकर 107.15 करोड़ रुपये बकाया हो चुके थे।
दूसरी ओर, कंपनी ने इस बकाया राशि को लेकर आपत्ति जताई थी। इसी भुगतान विवाद के बीच किंगडम ऑफ ड्रीम्स की लीज समाप्त करने की कार्रवाई भी सामने आई।
1.34 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर कब्जे का आरोप
एचएसवीपी ने कंपनी पर लीज में शामिल भूखंड के अलावा 1.34 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर कब्जा करने का आरोप भी लगाया था। अदालत के रिकॉर्ड में इस अतिरिक्त जमीन को लेकर प्राधिकरण की ओर से 114.15 करोड़ रुपये की मांग का उल्लेख किया गया था।
जुलाई 2022 में एचएसवीपी द्वारा लीज समाप्त कर परिसर का कब्जा लेने की कार्रवाई किए जाने की बात भी न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज है।
2011 से बकाया किराये को लेकर सवाल
लोकायुक्त की रिपोर्ट में वर्ष 2011 से किराया बकाया रहने के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में बैंक गारंटी के नवीनीकरण और वर्ष 2014 में 3.92 करोड़ रुपये का चेक बाउंस होने के बाद भी मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका और पूरे प्रकरण की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लोकायुक्त ने यह भी देखा कि बकाया राशि और अन्य संबंधित मामलों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई।
सरकार को नुकसान की भरपाई की सिफारिश
लोकायुक्त की रिपोर्ट में सरकार को हुए 434.02 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश की गई है। इसके तहत संबंधित कंपनी से राशि की वसूली और मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की सिफारिश भी की गई है।
सीबीआई जांच की आवश्यकता का उल्लेख
लोकायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई से कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। रिपोर्ट में सरकार से वित्तीय नुकसान की भरपाई, जिम्मेदारी तय करने और मामले में आगे आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
किंगडम ऑफ ड्रीम्स की जमीन की लीज, बकाया किराये और अतिरिक्त जमीन से जुड़े इस पुराने विवाद में अब लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद आगे की सरकारी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
