गुरुग्राम: संविधान की मर्यादा का केंद्र है टॉवर ऑफ जस्टिस:
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरुग्राम में निर्मित अत्याधुनिक ‘टॉवर ऑफ जस्टिस’ केवल एक न्यायिक भवन नहीं, बल्कि संविधान की मर्यादा, न्यायपालिका की गरिमा और नागरिकों के न्याय पर अटूट विश्वास का सशक्त प्रतीक है। वह गुरुग्राम में आयोजित टॉवर ऑफ जस्टिस के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ त्वरित, सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम आज ज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे शहर में आधुनिक न्यायिक परिसर की स्थापना न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जिस भवन की आधारशिला रखी गई थी, उसका लोकार्पण आज भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के करकमलों से होना एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ ‘ईज ऑफ जस्टिस’ को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो सरल, सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि प्रत्येक नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने महाभारत के युधिष्ठिर और यक्ष संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय न्याय परंपरा का मूल आधार निष्पक्षता, धर्म और सिद्धांत हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि गुरु द्रोणाचार्य और माता शीतला देवी की पावन भूमि पर स्थापित यह न्यायिक परिसर आने वाले वर्षों में न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत करेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दो टावरों में विकसित यह न्यायिक परिसर उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में शामिल है। पुराने परिसर में जहां 45 अदालतें थीं, वहीं नए परिसर में 55 आधुनिक अदालत कक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा यहां बैंक, डाकघर, बार लाइब्रेरी, मध्यस्थता केंद्र और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली अधिक दक्ष और जनहितकारी बनेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पुराने न्यायालय परिसर के एक हिस्से में अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर्स का निर्माण कराया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर और पर्याप्त कार्यस्थल की सुविधा मिल सके।
