गुरुग्राम: हाजीपुर-पातली में डंपिंग यार्ड के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध, महापंचायत की चेतावनी

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): नगर निगम गुरुग्राम द्वारा फर्रुखनगर खंड के हाजीपुर-पातली गांव में प्रस्तावित डंपिंग यार्ड के विरोध में शनिवार को ग्रामीणों ने संयुक्त पंचायत आयोजित कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। सरपंच एसोसिएशन के प्रधान धर्मपाल गुरावलिया के नेतृत्व में हुई पंचायत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया गया कि क्षेत्र में किसी भी कीमत पर डंपिंग यार्ड नहीं बनने दिया जाएगा।

पंचायत में ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नगर निगम का एक भी कचरा डंपर या ट्रॉली गांव में पहुंची तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह विरोध केवल पातली और हाजीपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे फर्रुखनगर क्षेत्र में डंपिंग यार्ड का विरोध किया जाएगा।

सुल्तानपुर नेशनल पार्क के पास प्रस्तावित यार्ड पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित डंपिंग यार्ड की भूमि गांव की आबादी से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि आसपास कई ढाणियां बसी हुई हैं। इसके अलावा यह भूमि सुल्तानपुर नेशनल पार्क से लगभग तीन किलोमीटर दूर है। पंचायत में दावा किया गया कि पर्यावरणीय नियमों के अनुसार नेशनल पार्क के पांच किलोमीटर के दायरे में डंपिंग यार्ड बनाना उचित नहीं है, क्योंकि यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इसी भूमि के निकट रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है और 20 अप्रैल 2026 को ग्राम पंचायत इस चार एकड़ भूमि पर पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह को भेज चुकी है। साथ ही यह भूमि वर्तमान में कृषि कार्य के लिए पट्टे पर भी दी गई है।

बीमारियों और प्रदूषण का जताया खतरा

पंचायत में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि यदि यहां डंपिंग यार्ड बनाया गया तो पूरे फर्रुखनगर क्षेत्र में प्रदूषण, दुर्गंध और कीट-पतंगों की समस्या बढ़ेगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि इससे क्षेत्र का वातावरण दूषित होगा और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।

सरकार से मांग नहीं मानी गई तो होगी महापंचायत

ग्रामीणों ने सरकार से प्रस्तावित डंपिंग यार्ड की योजना को तत्काल रद्द करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो क्षेत्र की सरदारी को एकजुट कर महापंचायत बुलाई जाएगी और उसके बाद सरकार के निर्णयों के खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

ग्रामीणों ने दोहराया कि पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और क्षेत्र के विकास को देखते हुए प्रस्तावित डंपिंग यार्ड को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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