हरियाणा, वायरल सच (ब्यूरो) : हरियाणा सरकार administrative restructuring प्रक्रिया को अंतिम चरण में ला रही है। राज्य में जल्द ही नए जिले, तहसील और उप‑तहसील बनने की तैयारी तेज हो गई है। कैबिनेट की सब‑कमेटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट अब अंतिम स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रही है।
पहले चरण में प्रस्तावित 5 नए जिले
स्थानीय प्रशासन और जनता से प्राप्त मांगों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित पांच नए जिलों की रूपरेखा तैयार की गई है:
- हांसी जिला (वर्तमान में हिसार)
- डबवाली जिला (वर्तमान में सिरसा)
- असंध जिला (वर्तमान में करनाल)
- सफीदों जिला (वर्तमान में जींद)
- गोहाना जिला (वर्तमान में सोनीपत)
इन प्रस्तावित जिलों में स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों द्वारा लिखित प्रस्ताव सौंपे गए हैं। मांगों में प्रशासनिक दूरी कम करने, सरकारी सुविधा आसान करने और विकास संतुलन बनाए जाने का मकसद है।
जनगणना की तैयारी में समयसीमा की भूमिका
भारत के मुख्य जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रशासनिक इकाइयों में बदलाव की अंतिम तारिख बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दी है। इसके पश्चात, 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक कोई भी परिवर्तन संभव नहीं होगा, क्योंकि राज्य-स्तर की जनगणना चली रहेगी।
यह समय सीमा हरियाणा सरकार के लिए एक अवसर है कि वह नए विस्तारों को अंतिम रूप दे और जनगणना के लिए सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढांचा तैयार करे।
तहसील व उप‑तहसील निर्माण: स्थानीय भागीदारी जरूरी
नए उपमंडल, तहसील और उप‑तहसील की स्थापना के लिए नियम स्पष्ट हैं:
- संबंधित विधायक, नगर पालिका, या नगर निगम से लिखित प्रस्ताव अनिवार्य
- ब्लॉक समिति का समर्थन जरूरी
- निर्माण का निर्णय प्रशासनिक लाभ और विकास को दृष्टिगत रखकर लिया जाएगा
इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्र की प्रशासनिक पहुंच और जनता की सरकारी सेवाओं तक पहुंच दोनों बेहतर होंगे।
मानेसर मामला: प्रस्ताव अधर में
हालांकि मानेसर को भी ज़िला बनाने की मांग उठ रही है, लेकिन इस पर अभी तक लिखित प्रस्ताव गायब है। इस कारण, कमेटी ने इसे अपने रिकॉर्ड में सम्मिलित नहीं किया है।
जैसे ही मानेसर निवासी लिखित प्रस्ताव देंगे, सरकार इस पर विचार कर सकती है। निगम-स्तर की स्वीकृति मिलने पर नए ब्लॉक अथवा तहसीलों का गठन भी हो सकता है।
समिति का विस्तार: समयसीमा में संशोधन
विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सब-कमेटी का कार्यकाल 4 मार्च को समाप्त हो गया था, जिसे बढ़ाकर 30 जून 2025 किया गया।
अब अगले चरण में इसे 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाया जा रहा है ताकि प्रस्तावों की नई समीक्षा हो सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
तैयारी से क्या बदल सकता है:
- अनुशासनिक कार्यों में सुधार: जिला स्तर पर फैसले तेजी से होंगे
- सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुँचेगा
- खरीफ और रबी सीज़न में फसल की बेहतर निगरानी संभव होगी
- स्वास्थ्य, शिक्षा व नागरिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी
नए जिलों की स्थापना से खासकर विकास कार्यों में तेजी आएगी और स्थानीय समस्या-समाधानों की क्षमता बढ़ेगी।
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