आपातकाल लोकतंत्र पर हमला: राव इंद्रजीत की कड़ी आलोचना

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो) : आपातकाल लोकतंत्र पर हमला” था, और यह भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला अध्याय बना। 25 जून 1975 को, जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, तो उन्होंने लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों को नकारते हुए देश पर तानाशाही का शिकंजा कस लिया। इस दौरान ना केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की निष्पक्षता को भी कुचला गया।

कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र को तानाशाही में बदला


राव इंद्रजीत सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा, “इंदिरा गांधी ने सत्ता के संरक्षण के लिए पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचल दिया था। उन्होंने देश पर आपातकाल थोपा, क्योंकि उन्हें अपनी सत्ता खोने का डर था।” उनका कहना था कि इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति और अस्थिरता का हवाला देकर संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग किया, और इस रास्ते पर चलकर उन्होंने देश को तानाशाही की ओर धकेल दिया।

राव इंद्रजीत सिंह ने आगे कहा कि आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और न्यायपालिका की निष्पक्षता को चोट पहुंचाई गई। उनका मानना था कि इस कदम से लोकतांत्रिक संस्थाओं का विश्वास खत्म हो गया, जिससे भारतीय राजनीति पर गहरा असर पड़ा।

आपातकाल के दौरान लोकतंत्र पर हुआ हमला और नागरिक अधिकारों का हनन


राव इंद्रजीत सिंह ने कहा, “आपातकाल के दौरान 1 करोड़ 7 लाख लोगों की नसबंदी की गई। 26 हजार से ज्यादा नेता और 2 लाख से अधिक आम लोग केवल विरोध करने की वजह से जेलों में डाले गए। यह सब लोकतंत्र की हत्या था।” उन्होंने यह भी कहा कि जब इंदिरा गांधी ने संविधान की शपथ ली थी, उसी संविधान की आत्मा को उन्होंने इस कृत्य के द्वारा कुचला।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी को घेरते हुए यह भी कहा कि जब कभी कांग्रेस सत्ता संकट में होती है, तो वह लोकतांत्रिक संस्थाओं और देश के संवैधानिक मूल्यों को ताक पर रख देती है। राव इंद्रजीत सिंह का कहना था कि कांग्रेस की सत्ता की हताशा ने भारत के लोकतंत्र को कमजोर किया और संविधान का मजाक उड़ाया।

कांग्रेस का अहंकार और तानाशाही की प्रवृत्तियाँ


केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा, “आपातकाल के समय इंदिरा गांधी ने पूरी व्यवस्था को अपनी कठपुतली बना लिया था। जब चुनावों में उन्हें दोषी ठहराया गया, तो उन्होंने नैतिकता से इस्तीफा देने की बजाय सत्ता को बचाने के लिए पूरी व्यवस्था को अपने नियंत्रण में कर लिया।” राव इंद्रजीत सिंह ने इस फैसले को लोकतंत्र की सर्वोच्च भावना के खिलाफ बताया और यह कहा कि कांग्रेस ने यह साबित किया कि जब कभी उसकी सत्ता संकट में आती है, तो लोकतांत्रिक सिद्धांतों की कोई अहमियत नहीं रहती।

कांग्रेस शासित राज्यों में आज भी कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में आज भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन होता है। “विरोध का दमन, धार्मिक तुष्टिकरण और सत्ता का अहंकार कांग्रेस शासित राज्यों में खुलेआम दिखाई देता है। यह वही सोच है, जो आपातकाल के दौरान उभरी थी,” राव इंद्रजीत सिंह ने आरोप लगाया।

भा.ज.पा. के नेताओं ने किया समर्थन


इस प्रेस वार्ता में राव इंद्रजीत सिंह के साथ भाजपा के कई अन्य नेता भी उपस्थित थे, जिनमें जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी, विधायक मुकेश शर्मा, मेयर राजरानी मल्होत्रा और जिला उपाध्यक्ष अजीत यादव शामिल थे। सभी नेताओं ने आपातकाल के काले अध्याय को याद करते हुए कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और हम इस दिशा में निरंतर काम करेंगे।

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