Delhi, वायरल सच (ब्यूरो): Delhi में प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने Delhi पुलिस पर छात्राओं की शिकायत के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार करने का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर करीब 12 मिनट का एक वीडियो साझा किया। इसमें केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु समेत कुछ छात्राओं ने Delhi प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित दुर्व्यवहार से जुड़े अपने अनुभव बताए। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी युवाओं, विशेषकर छात्राओं, के प्रति एकजुटता जताते हुए मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही।
दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने अपने बयान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अधीन काम करने वाली Delhi पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में शिकायत दर्ज करने से इनकार किया गया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई को बिना जवाबदेही के जारी नहीं रहने दिया जा सकता। राहुल गांधी के अनुसार, मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
हालांकि, छात्राओं के साथ कथित मारपीट और Delhi पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार किए जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं हुई है। मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष और किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
अथिरा और रितु ने वीडियो में बताए अनुभव
राहुल गांधी की ओर से साझा किए गए वीडियो में प्रदर्शन के दौरान Delhi पुलिस कार्रवाई, हिरासत में लिए गए छात्रों के बयान और कथित दुर्व्यवहार से जुड़े अनुभव शामिल हैं।
वीडियो में केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु समेत कुछ छात्राओं ने पुलिस वाहन और थाने में कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। वीडियो में छात्रों की शिकायत, राहुल गांधी के साथ उनकी मुलाकात और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दृश्य भी दिखाई देते हैं।
इन बयानों के आधार पर छात्र संगठनों ने कार्रवाई और जवाबदेही की मांग उठाई है। हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोप अपने आप में किसी घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हैं। आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आवश्यक होगा।
धरासना सत्याग्रह का किया उल्लेख
राहुल गांधी ने अपने संदेश में वर्ष 1930 के धरासना सत्याग्रह का उल्लेख किया। उन्होंने सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में हुए अहिंसक विरोध प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि निहत्थे सत्याग्रहियों ने पुलिस की लाठियां सहने के बावजूद जवाबी हिंसा नहीं की थी।
राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस शारीरिक चोट पहुंचा सकती है, लेकिन सत्याग्रह की भावना को नहीं तोड़ सकती। इस संदर्भ के जरिए उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं और छात्राओं के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद संगठन की ओर से महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए।
इस घटनाक्रम के बाद छात्राओं की सुरक्षा, प्रदर्शन के दौरान Delhi पुलिस की भूमिका और शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। राहुल गांधी ने केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्नीथला और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से भी इस संबंध में बातचीत की।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
राहुल गांधी ने छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले में आगे की कार्रवाई शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल, छात्राओं की ओर से लगाए गए आरोपों और राहुल गांधी के बयानों के बीच Delhi पुलिस का आधिकारिक पक्ष तथा स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। निष्पक्ष जांच से घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है।
