नई दिल्ली, वायरल सच (ब्यूरो): Bharat-America के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता वैश्विक व्यापार और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के हित में जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान कही।
वित्त मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा जानकारी के मुताबिक, सीतारमण ने दक्षिण एशिया से जुड़े वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन के साथ एक संवाद सत्र में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है और समझौते को शीघ्र पूरा करना दोनों साझेदारों के हित में होगा।
Bharat-America व्यापार समझौते पर बातचीत जारी
वित्तमंत्री ने कहा कि Bharat-America के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से समझौते को जल्द पूरा किया जा सकेगा।
यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसरों, बाजार तक पहुंच और आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, वार्ता जारी रहने के कारण समझौते की सभी शर्तों और अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि Bharat-America व्यापार समझौते का पहला चरण तय हो चुका है और उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है। यह बयान समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में जारी प्रयासों को रेखांकित करता है।
चीन के साथ व्यापार असंतुलन पर चिंता
सीतारमण ने चीन के साथ Bharat के व्यापारिक संबंधों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की बातचीत के बावजूद बढ़ता व्यापार असंतुलन और चीन के बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच से जुड़ी पाबंदियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।
व्यापार असंतुलन का अर्थ है कि दो देशों के बीच आयात और निर्यात के मूल्य में अंतर हो। भारत के लिए यह अंतर कम करना और अपने उत्पादों को विदेशी बाजारों में अधिक अवसर दिलाना व्यापार नीति का अहम विषय है।
वित्तमंत्री की टिप्पणियां इस बात पर जोर देती हैं कि Bharat अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाजार तक बेहतर पहुंच और संतुलित व्यापारिक संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है।
चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर जोर
वित्तमंत्री ने Bharat की आर्थिक वृद्धि पर बात करते हुए कहा कि देश कोविड महामारी के बाद पिछले चार-पांच वर्षों में तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है। उन्होंने इस प्रदर्शन को सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे प्रयासों से जोड़ा।
सीतारमण के अनुसार, Bharat की विकास रणनीति में समावेशी विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका उद्देश्य आर्थिक प्रगति के अवसरों और संसाधनों तक समाज के विभिन्न वर्गों की पहुंच सुनिश्चित करना है।
उन्होंने युवाओं के कौशल विकास, संसाधनों की उपलब्धता और कमजोर वर्गों की जरूरतों पर ध्यान देने की आवश्यकता भी बताई। उनके मुताबिक, आर्थिक विकास के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि समाज के विभिन्न वर्गों को आगे बढ़ने के अवसर मिलें।
वित्तीय अनुशासन को बताया जरूरी
सीतारमण ने कहा कि आर्थिक विकास के प्रयासों के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है। सरकार को सार्वजनिक धन के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए खर्च से जुड़े फैसले सावधानीपूर्वक लेने चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए सार्वजनिक संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल भी होना चाहिए। विकास योजनाओं और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखना आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
व्यापार समझौते के अगले चरण पर नजर
Bharat-America व्यापार समझौते को लेकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की टिप्पणी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कानूनी मसौदे से संबंधित बयान वार्ता की मौजूदा स्थिति को सामने रखते हैं। फिलहाल बातचीत और मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं पर ध्यान है।
समझौते के अंतिम रूप, औपचारिक घोषणा और लागू होने की तारीख को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इसके पूरा होने पर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की दिशा और बाजार तक पहुंच से जुड़े प्रावधानों पर स्पष्टता मिल सकेगी।
