गुरुग्राम में RTI की जानकारी के लिए ChatGPT और Google का सहारा लेना पड़ा भारी, तहसीलदार पर 25 हजार का जुर्माना

गुरुग्राम, वायरल सच (ब्यूरो): सूचना का अधिकार (RTI) का जवाब समय पर नहीं देने और वेबसाइट पर जानकारी उपलब्ध होने की दलील को साबित करने के लिए ChatGPT और Google Search का सहारा लेने के मामले में हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने तत्कालीन तहसीलदार-सह-एपीआईओ सतीश कुमार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

यह आदेश सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने तीन समान मामलों की एक साथ सुनवाई के दौरान दिया। आयोग के अनुसार विभाग की ओर से जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होने की बात कही गई थी, लेकिन सुनवाई के दौरान इसे साबित करने के प्रयास सफल नहीं रहे।

डीएलएफ निवासी हरिंदर धींगड़ा ने 7 नवंबर 2022 को आरटीआई आवेदन दायर कर प्रशासनिक जानकारी मांगी थी। नियमानुसार 30 दिन के भीतर जवाब दिया जाना था, लेकिन एसपीआईओ की ओर से समय पर जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद 10 मई 2026 को अधूरा जवाब देते हुए कहा गया कि मांगी गई जानकारी विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

इस जवाब से असंतुष्ट होकर आवेदक ने आयोग का रुख किया। जून 2026 में हुई सुनवाई के दौरान एसपीआईओ के प्रतिनिधि ने आयोग के सामने वेबसाइट पर जानकारी लाइव दिखाने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद ChatGPT और Google Search के जरिए जानकारी उपलब्ध होने की बात साबित करने की कोशिश की गई।

आयोग ने अपने आदेश में इस प्रयास को निरर्थक बताते हुए कहा कि इससे विभाग की ओर से दी गई दलील पर सवाल खड़े हुए और आवेदक को गुमराह करने की स्थिति बनी।

सूचना आयुक्त ने कहा कि RTI के निपटारे में लापरवाही और ढीला रवैया स्वीकार्य नहीं है। आयोग ने हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना उचित कारण सूचना देने में देरी दंडात्मक कार्रवाई का आधार बन सकती है।

आयोग के हस्तक्षेप के बाद 21 अगस्त 2026 को आवेदक को पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी गई थी, लेकिन आयोग के अनुसार इससे शुरुआती देरी की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।

आयोग ने सतीश कुमार पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने को तीन महीने के भीतर सरकारी खाते में जमा कराने और उपायुक्त गुरुग्राम को इसकी वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यदि संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं तो राशि पेंशन से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सूचना देने में हुई देरी की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

शिकायतकर्ता हरेंद्र धींगड़ा ने बताया कि उन्होंने चार अपील दायर की थीं। इनमें से एक मामले में सजा हुई है, जबकि तीन मामलों को माफ कर निपटाया गया है। उन्होंने कहा कि वह इन तीन मामलों में भी हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

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